
31 मई को जैतापुर थाने से हथकड़ी के साथ हुए थे फरार
खरगोन। 31 मई को शातिर तरीके से जैतापुर थाना पुलिस को चकमा देकर फरार हुए आम्र्स एक्ट के आरोपी अंतत: पुलिस के हत्थे चढ़ गए है। फरार आरोपियों को पुलिस ने उनके गृहजिले जालंधर पंजाब से पकड़ा है। पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपियों को पकडऩे में पुलिस को काफी मशक्कत करना पड़ी। आरोपियों कि गिरफ्तारी के लिए भेष बदलकर निगरानी रखी गई। साइकिल रिक्शा चलाया, गन्ने का रस बेचा यहां तक की पेट्र्रोल पंप पर भी काम करते हुए निगरानी रखी गई। एएसपी नरेद्र सिंह रावत ने बताया कि वीरपाल पिता मुख्तयारसिंह और जगवींदरसिंह पिता जगतारसिंह दोनों निवासी ग्राम मुलेवाल तहसील शाहकोट जिला जालंधर पंजाब को 30 मई को जैतापुर थाना पुलिस ने एक- एक देशी पिस्टल के साथ गिरफ्तार कर न्यायालय पेश किया था, जहां से उन्हें एक दिन की पुलिस रिमांड पर सौंपा गया था।
5 टीमें कर रही थी सर्चिंग
दोनों आरोपी 31 मई की सुबह पहरे पर तैनात पुलिसकर्मियों को चकमा देकर फरार हो गए थे। जिनकी गिरफ्तारी के लिए डीआईजी सिद्धार्थ बहुगुणा, एसपी धर्मराज मीना ने एसआईटी का गठन करने के साथ ही 5 अन्य टीमें गठित की थी। इन टीमों ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जालंधर तक पहुंच मार्ग के ट्रांसपोर्ट की निगरानी की और उनके घर के बाहर पहरेदारी की। आखिरकार पुलिस को टेक्नीकल इनपुट के आधार पर सफलता मिली। पुलिस ने आरोपियों को उनके घर से धर दबोचा।
6 दिन तक घर के बाहर दिया पहरा
एएसपी ने बताया कि पुलिसवर्दी में तैनात रहने से इनके भाग जाने का डर था। इसलिए पुलिस ने 6 दिन दोनों के घर के बाहर ही डेरा डाला। टीम का हर सदस्य कोई रिक्शा चलाते, कोई गन्ने का जूस बेचते तो कोई पेट्रोल पंप पर कर्मचारी के रुप में काम करते हुए निगरानी रख रहा था। परिणामस्वरूप जगवींदरसिंह उर्फ सन्नी की पत्नी को निजी अस्पताल में भर्ती करने की सूचना मिली, जिस पर जगवींदर के वहां आने की संभावना नजर आई। 6 जून को दोनो को लोकल पुलिस थाना की मदद से शाहकोट रेलवे स्टेशन से पकडा गया। जहां जालंधर पंजाब में पेश कर ट्राजिंट रिमांड पर लाया गया।
20 हजार रुपए का था ईनाम
आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दो दिन पहले ही डीआईजी सिद्धार्थ बहुगुणा ने ईनाम की राशि बढ़ाते हुए 20 हजार रुपए कर दी थी। इस मामले में दो पुलिसकर्मी लाईन अटैच भी किए गए थे।
