
ग्वालियर-चंबल में अब तक 22 आरक्षक पकड़े गए, धोखाधड़ी व परीक्षा अधिनियम की धाराओं में एफआईआर
भोपाल। पुलिस भर्ती परीक्षा-2023 में फर्जीवाड़ा कर पास हुए नवआरक्षकों के मामले एक के बाद एक सामने आ रहे हैं। ग्वालियर-चंबल में अब तक 22 आरक्षक पकड़े जा चुके हैं, जिन्होंने अपनी जगह किसी सॉल्वर को बैठाकर परीक्षा पास की है। जांच में जुटे अफसरों को अब संदेह है कि कई आरक्षकों की बोर्ड परीक्षा की मार्कशीट भी फर्जी हो सकती है, इसलिए नवआरक्षकों की अंकसूचियों की भी जांच करवाई जाएगी।
गौरतलब है, कि आरक्षक भर्ती के बाद हर जिले को नवआरक्षकों का कोटा दिया गया है। मुरैना जिला पुलिस को 38 और 5वीं बटालियन को 106 आरक्षकों का कोटा मिला है। इनमें से बटालियन में अब तक पांच ऐसे आरक्षक पकड़े जा चुके हैं, जिन्होंने आधार कार्ड में फोटो व बायोमैट्रिक फिंगर प्रिंट बदलवाकर साल्वर के जरिए भर्ती परीक्षा पास की। जिला पुलिस भी ऐसे दो नवआरक्षक पकड़ चुकी है। इन सातों पर धोखाधड़ी व परीक्षा अधिनियम की धाराओं में एफआइआर हो चुकी है।
कई एंगल से चल रही है जांच
आरक्षक भर्ती की जांच कई एंगल से चल रही है। इसी बीच पांचवी बटालियन के अफसरों ने तय किया है कि वह सभी 106 नवआरक्षकों की 10वीं और 12वीं की अंकसूचियों की जांच करवाएगी। जिला पुलिस को मिले 38 नवआरक्षकों में से तीन आरक्षक किसी और विभाग की नौकरी में चले गए हैं। ऐसे में जिला पुलिस बचे हुए 35 नवआरक्षक (इनमें दो फर्जी भी हैं, जिन पर एफआइआर हो चुकी है) इन सभी की अंकसूचियों की जांच करवाएगी। इसके लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल को सभी अंकसूचियों का रिकॉर्ड भेजने की तैयारी हो चुकी है।
एसटीएफ को दी जा सकती है जांच
आरक्षक भर्ती में हुए फर्जीवाड़े ग्वालियर-चंबल के अलावा पूरे मध्यप्रदेश में सामने आने लगे हैं। अभी तक जिन-जिन थानों में एफआइआर हो रही है, वहीं जांच हो रही है। लेकिन स्थानीय पुलिस को जांच के लिए पूरे दस्तावेज, वीडियो फुटेज, आधार अपडेशन की जानकारी नहीं मिल रही। दरअसल, अभ्यर्थियों ने जहां-जहां से आधार अपडेट करवाए हैं, वहां से ही जानकारी मिल सकती है। इसके लिए पुलिस मुख्यालय से भी भर्ती से जुड़े कई दस्तावेजों की जरूरत पड़ रही है, जो जानकारियां समय पर नहीं मिल पा रहीं। ऐसे में पुलिस के वरिष्ठ अफसरों ने आरक्षक भर्ती के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) गठन का सुझाव पीएचक्यू को दिया है।
