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मुठभेड़ के बाद जंगलों में सर्चिंग कर रहे सीआरपीएफ, कोबरा, हॉकफोर्स और जिला पुलिस बल के जवान
वर्ष 2007 के बाद से जिले से दलम में शामिल नहीं हुआ कोई भी नक्सली
पत्रकारवार्ता में आइजी संजय सिंह ने दी जानकारी

बालाघाट । रुपझर थाना क्षेत्र अंतर्गत सोनेवानी चौकी के पचामा-दादर व कटेझिरिया के घने जंगलों में 14 जून को हुई मुठभेड़ में मारा गया नक्सली रवि ग्रेनेड लांच करने में एक्सपर्ट था। पहले वह दर्रेकसा दलम में था। बाद में मलाजखंड दलम में शामिल हो गया। मुठभेड़ में नक्सली रवि की मौत होना एक बड़ी सफलता है। मुठभेड़ के बाद भागने के दौरान नक्सलियों ने सीआरपीएफ जवानों पर पुन: फायरिंग की थी। वर्ष 2007 के बाद से जिले से कोई भी ग्रामीण दलम में शामिल नहीं हुआ है। यह जानकारी आइजी संजय सिंह ने सोमवार को पत्रकारों को दी।
पत्रकारों से चर्चा करते हुए आइजी संजय सिंह ने कहा कि 14 जून को सूचना के आधार पर ज्वाईंट ऑपरेशन चलाया गया था। इस ऑपरेशन में सीआरपीएफ, हॉकफोर्स, कोबरा बटालियन और जिला पुलिस बल के जवान शामिल थे। मुठभेड़ में जवानों को चार एसीएम रेंक के नक्सलियों को मारने में सफलता मिली है। मुठभेड़ के दौरान मौके पर दर्जन भर नक्सली मौजूद रहे होंगे। इनमें से कुछेक के घायल होने की भी संभावना है। हालांकि, घटना के बाद से जंगलों में सर्च ऑपरेशन जारी है। सीआरपीएफ, हॉकफोर्स, जिला पुलिस बल, कोबरा बटालियन के जवान लगातार जंगल में सर्चिंग कर रहे हैं।
अन्य राज्यों से नक्सलियों के आने के मिले थे इनपुट
आइजी संजय सिंह ने बताया कि पिछले 4-5 माह में अन्य राज्यों से कुछेक नक्सलियों के बालाघाट में आने के इनपुट मिले हैं। जिसके आधार पर बालाघाट पुलिस ने अपनी योजना तैयार की है। योजना अनुसार जवानों को तैयार कर आगे की कार्यवाही की जा रही है। इसी रणनीति पर मिशन 2026 के तहत कार्य किया जा रहा है। बालाघाट जिले से पूरी तरह से नक्सलियों का सफाया कर दिया जाएगा।
डिंडौरी जिले में नक्सलियों का मूवमेंट समाप्त
आइजी ने जानकारी दी है कि बालाघाट जोन के डिंडौरी जिले में नक्सलियों का मूवमेंट समाप्त हो गया है। जबकि मंडला जिले में कुछ मूवमेंट हो रहा है। कान्हा नेशनल पार्क से लगे मोतीनाला क्षेत्र में नक्सलियों की मौजूदगी बनी हुई है। बालाघाट जिले में नक्सलियों की सक्रियता है। नक्सलियों की प्रत्येक गतिविधियों पर योजनाबद्ध तरीके से नजर रखी जा रही है। ताकि नक्सली अपने मंसूबों पर कामयाब न होने पाए।
वर्ष 2007 में संगीता हुई थी दलम में शामिल
आइजी ने बताया कि वर्ष 2007 में बालाघाट जिले से संगीता ही दलम में शामिल हुई थी। इसके बाद से नक्सली दलम में बालाघाट जिले से कोई भी शामिल नहीं हुआ है। हालांकि, मौजूदा समय में दलम में बालाघाट जिले से तीन नक्सली शामिल है। उन्होंने कहा कि नक्सली स्थानीय लोगों को दलम में इसलिए शामिल करते हैं कि उन्हें भौगोलिक स्थिति की ज्यादा जानकारी होती है, जिसका उन्हें फायदा होता है। पुलिस की सक्रियता के चलते फिलहाल जिले से कोई भी दलम में शामिल नहीं हुआ है। पुलिस इसके लिए जागरुकता अभियान भी चला रही है।
नक्सलियों के आत्मसमर्पण के लिए किए जा रहे प्रयास
आइजी ने कहा कि दलम में शामिल नक्सलियों को आत्मसमर्पण कराने का प्रयास किया जा रहा है। मध्यप्रदेश की आत्मसमर्पण नीति सबसे अच्छी है। इसके लिए नक्सलियों के परिजनों से भी चर्चा की जा चुकी है, उन्हें मुख्य धारा में लाने के लिए प्रेरित भी किया है लेकिन इसमें पुलिस को सफलता नहीं मिल पाई है। उन्होंने कहा कि नक्सली लाल आतंक का दामन छोडकऱ कहीं भी, किसी के पास भी, किसी भी स्थान पर समर्पण कर सकता है, उसे मध्यप्रदेश की आत्मसमर्पण नीति का लाभ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नक्सलियों की मंशा होती है कि जब वे दलम छोड़ते हैं तो वे अपने गांव और परिजनों के नजदीक रहना चाहते हैं। संभवत: इसी कारण से नक्सली आत्मसमर्पण नहीं कर पा रहे हैं। दरअसल, बालाघाट जिले में अन्य राज्यों से आए हुए नक्सली दलम का नेतृत्व कर रहे हैं।

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