
गुना हादसे के बाद हरकत में आया प्रशासन
गुना | शहर में बुधवार को नगर पालिका परिसर स्थित एक दुकान की छत गिरने के बाद प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है। हादसे के 24 घंटे के भीतर ही जिला प्रशासन ने शहर की जर्जर और खतरनाक इमारतों पर बड़ा कदम उठाते हुए व्यापक सर्वे का ऐलान कर दिया है। कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने स्वयं इस मामले में संज्ञान लेते हुए स्पष्ट कहा कि किसी भी सूरत में लोगों की जान से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। गौरतलब है कि बुधवार को जय स्तंभ चौराहा स्थित नगर पालिका परिसर की दूसरी मंजिल पर बनी एक दुकान की छत अचानक भरभराकर गिर गई थी। इस दुर्घटना में दुकानदार सहित लगभग आधा दर्जन लोग घायल हो गए थे। सौभाग्यवश इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह घटना एक बड़े खतरे की चेतावनी बनकर सामने आई, जिसने प्रशासन को तुरंत कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया।
हादसे के बाद गुरुवार को कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल के निर्देश पर नगरपालिका और लोक निर्माण विभाग की संयुक्त टीम ने शहर की जर्जर इमारतों का निरीक्षण शुरू कर दिया। इस निरीक्षण दल में सीएमओ मंजुषा खत्री, पूर्व सीएमओ तेज सिंह यादव, पीडब्ल्यूडी और नगर पालिका के इंजीनियर एवं कर्मचारी शामिल रहे। सर्वे के दौरान हनुमान चौराहा स्थित अभिभाषक चैंबर, विजयवर्गीय परिसर समेत अन्य जर्जर भवनों का भी निरीक्षण किया गया। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी जर्जर एवं क्षतिग्रस्त भवनों की सूची तत्काल तैयार की जाए और वहां की स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जाए। साथ ही जहां भी जनहानि की आशंका हो, वहां तुरंत कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी भवन या दुकान की हालत बेहद खराब पाई जाती है, तो उसे तत्काल खाली करवाया जाएगा।
नगरपालिका अधिकारियों ने बताया कि जर्जर इमारतों को चिन्हित कर उनके स्वामियों को नोटिस जारी किए जाएंगे, और यदि जरूरी हुआ तो वैधानिक कार्यवाही भी की जाएगी। वहीं, आम जनता से भी अपील की गई है कि वे ऐसे भवनों में न रहें जिनकी स्थिति असुरक्षित है, और प्रशासन को इस संबंध में सूचित करें। गुरुवार दोपहर को व्यापार उद्योग संघ के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में नगर पालिका परिसर के दुकानदारों का एक प्रतिनिधिमंडल कलेक्ट्रेट पहुंचा, जहां उन्होंने अपनी विभिन्न मांगें कलेक्टर के समक्ष रखीं। इस दौरान कलेक्ट्रेट में एक बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें दुकानदारों की सुरक्षा, पुनर्व्यवस्था और क्षतिपूर्ति जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
