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दमोह। म.प्र. हिंदी साहित्य सम्मेलन इकाई दमोह के तत्वावधान में रामकुमार विद्यालय में तुलसी जयंती व प्रेमचंद जयंती के उपलक्ष्य में व्याख्यान माला सम्पन्न हुई। कार्यक्रम अध्यक्ष डा. आर.एन.चिले, मुख्य अतिथि-वक्ता प्रोफे. डा. राणा कुंजर सिंह (शास.कला वाणिज्य महाविद्यालय सागर),तथा विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार सत्यमोहन वर्मा रहे। पुष्पा चिले (अध्यक्ष लेखिका संघ)द्वारा सरस्वती वंदना व मधुलता पाराशर द्वारा तुलसी पद गायन किया गया। तदुपरांत कथा साहित्य पुरोधा मुंशी प्रेमचंद के लेखन पर व्याख्यान करते हुए सत्यमोहन वर्मा ने कहा कि जब प्रेमचंद ने हिंदी कहानियां लिखना शुरू किया तब देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था, जिसमें कई विचार धारायें थीं।उन्होंने उन दिनों समाज में जन्म से लेकर मृत्यु तक व्याप्त कुरीतियों को उजागर कर, निजात दिलाने की कोशिश की।परंपरा के विकृत रूप को समाज से बाहर निकाल कर मनुष्य के सुखी जीवन को साकार रूप लेखन में दिया। उनके द्वारा लगभग 900 कहानियां 13 उपन्यास व नाटक इसी भावभूमि की विपुलता को लिए हुए लिखे हैं, जो पठनीय हैं।

देश के नामचीन समीक्षक आचार्य नंददुलारे बाजपेयी का कथन है कि प्रेमचंद का “गोदान“ गद्य साहित्य में मील का पत्थर है।संत कवि तुलसी के समग्र काव्यत्व के अंतर्गत डा. राणा कुंजर सिंह ने कहा कि तुलसी का काव्यांश लोक जीवन में सदा प्रसांगिक रहता है।इस तथ्य के मर्म को समझना होगा।उनके समग्र काव्य पर विचार करने पर हम पाते हैं कि काव्य में राम को जाने फिर तुलसी रचित काव्य को जाने। वे स्वयं कहते हैं“कीरति भनिति भूति भलि सोई,सुरसरि सम सब कर हित होई“पूरे काव्य में उनका मंतव्य है-राम अनंत, अनंत गुण अमित काव्य विस्तार- उनके राम प्रत्येक जीव में हैं।इसलिए परिणति का सहज दर्शन “परहित सरिस धर्म नहीं भाई“दिग्दर्शित होता है। उनके काव्य मर्म के सार का यह भी विंदु है कि हम अपने जीवन में दुहरे चरित्र से मुक्ति पा लें तभी  जीवन की सार्थकता सिद्ध होगी।उनका सम्पूर्ण काव्य लोक मंगल तथा सामाजिक समन्वय का संवाहक है। अध्यक्ष डा.चिले ने कहा कि महान युगदृष्टा संत तुलसी आत्मचेता व्यक्तित्व के कवि थे।तत्कालीन उथल पुथल,असमंजस, व विपरीत परिस्थितियों में व्यक्ति के भीतर विश्वास जगाने में उनका काव्य चिंतन कारगर रहा। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार नारायण सिंह ठाकुर, डा.पी.एल. शर्मा, रामकुमार तिवारी, अमर सिंह राजपूत, पी,एस.परिहार, बी.एम.दुबे, विमला तिवारी, राजलक्ष्मी पाराशर, गोविंद मिश्र, नंदकिशोर पाठक, सदन नेमा, भूपेंद्र जैन,परसोतम रजक,रिषी उपाध्याय, राजेश शर्मा प्रदीप यादव की उपस्थिति रही। इकाई अध्यक्ष रमेश तिवारी द्वारा संचालन तथा सचिव मानव बजाज द्वारा सादर आभार ज्ञापित किया गया।

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