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वाहन खरीदने जा रहे लोग और परिवहन अधिकारी परेशान

परिवहन आयुक्त को लिखा पत्र, 24 घंटे बाद डीलर्स द्वारा एड टू कार्ट किए नंबर रिलीज करने की व्यवस्था लागू हो
भोपाल। परिवहन विभाग द्वारा वाहनों के नंबरों से लेकर रजिस्ट्रेशन तक की सारी व्यवस्था डीलर्स को सौंप दी गई है। इसके बाद से डीलर्स अकसर कई नंबरों को ब्लॉक कर रहे हैं, जिससे वे नंबर लोग चाहकर भी नहीं ले पा रहे हैं और सीरिज खत्म हो जाने के बाद उन नंबरों को ले पाना संभव भी नहीं हो पा रहा है। इस मामले में शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने परिवहन आयुक्त को पत्र लिखते हुए सिस्टम में बदलाव की मांग की है।
अधिकारियों ने बताया कि वाहनों के लिए नंबर जारी करने की तीन व्यवस्थाएं मौजूद हैं। हर सीरिज में उपलब्ध कुल 9999 नंबरों में से करीब 500 नंबरों को वीआईपी घोषित किया गया है, जिन्हें नीलामी के माध्यम से खरीदा जा सकता है। इनकी कीमत 5 हजार से 1 लाख तक है। इसके बाद च्वाइस नंबर की व्यवस्था है, जिसके तहत शेष बचे नंबरों में से वाहन मालिक वाहन खरीदते वक्त कोई भी नंबर पसंद कर सकता है। दोपहिया में इसके लिए 2100 रुपए और चार पहिया व अन्य वाहनों के लिए 5100 रुपए की व्यवस्था है। आखिरी में 00 होने पर यह शुल्क और बढक़र 5 से 15 हजार तक पहुंच जाता है। वहीं आखिरी में आती है रेंडम नंबर की व्यवस्था, जिसमें वाहन मालिक द्वारा उक्त दोनों व्यवस्था में से किसी को भी न चुनने पर सिस्टम अपने आप वाहन को रनिंग सीरिज से नंबर दे देता है। अब इस व्यवस्था के तहत च्वाइस नंबर की व्यवस्था पूरी तरह डीलर्स के हाथ में है, जहां डीलर्स नंबरों को ब्लॉक कर रहे हैं।
कैसे होते हैं नंबर ब्लॉक
परिवहन विभाग के वाहनों के रजिस्ट्रेशन के लिए बनाए गए ‘वाहन’ पोर्टल पर जब डीलर्स किसी नंबर को किसी वाहन के लिए लेना चाहते हैं तो वे बिना वाहन नंबर डाले ही उसे ग्राहक के लिए एड टू कार्ट कर लेते हैं, जिससे ये उनके आईडी के साथ ब्लॉक हो जाता है। अब डीलर्स अपने यहां आने वाले ग्राहकों को खास नंबरों के रूप में ऐसे उपलब्ध नंबर दिखाते हैं और यह भी कहते हैं कि ये नंबर आपको और कहीं नहीं मिलेंगे, क्योंकि इन्हें हमने ब्लॉक कर रखा है। सिस्टम की कमी के कारण जब तक डीलर्स इन नंबरों को रिलीज नहीं करते हैं, तब तक ये नंबर उनके आईडी पर ब्लॉक ही रहते हैं।
ब्लॉक होने के कारण उपयोग ही नहीं हो पाए
परिवहन अधिकारियों ने बताया कि डीलर्स द्वारा जब नंबर ब्लॉक किए जाते हैं और अगर वे उसी सीरिज में रहते हुए किसी गाड़ी को दे दिए जाते हैं तब तक तो ठीक है, लेकिन अगर सीरिज खत्म हो जाती है तो ऐसे नंबरों को इसके बाद गाड़ी पर रजिस्टर्ड नहीं किया जा सकता है, क्योंकि सिस्टम उक्त सीरिज के नंबरों को खत्म मान लेता है। इसके कारण कई अच्छे नंबर किसी को भी नहीं मिल पाते और खत्म हो जाते हैं। इससे परिवहन विभाग को भी अच्छे नंबरों से होने वाली आय का नुकसान होता है।

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