मीटर हटवाने लिखित में दिये हजारों आवेदन

गुना। बिजली उपभोक्ता एसोसिएशन के बैनर तले हजारों उपभोक्ताओं ने बिजली वितरण कम्पनी गुना के सामने स्मार्ट मीटर के खिलाफ धरना दिया। धरने में उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर को हटवाने के लिए लिखित में आवेदन दिया और पावती ली। आवेदन में तार्किक ढंग से कहा गया कि_ सर्वप्रथम तो, हम यह स्मार्ट मीटर नहीं चाहते क्योंकि यह मीटर प्रीपेड है/होगा। यह उस अनुबंध के विरुद्ध है, जो बिजली कनेक्शन लेने के लिए आपके साथ हमारे द्वारा किया गया, क्योंकि हमने नए प्रीपेड मीटर के लिए कोई अनुबंध नहीं किया था। इस मीटर के माध्यम से, उपभोक्ताओं की बिलिंग प्रणाली में टी एंड डी प्रणाली, डायनेमिक प्राइसिंग प्रणाली और रियल टाइम मॉनिटरिंग प्रणाली को लागू करना संभव है। इस मीटर को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए नियंत्रित किया जाएगा। नतीजतन, इस मीटर के सॉफ्टवेयर को नियंत्रित करने और उपभोक्ता की मीटर रीडिंग को बदलने, वास्तविक बिजली खपत से लेकर कंपनी के लाभ के हितों को इच्छानुसार पूरा करने की पर्याप्त संभावनाएं होंगी। बिजली बिलों का बोझ बहुत बढ़ जाएगा। हाल ही में, विभिन्न राज्यों के उपभोक्ता इस स्थिति का सामना कर रहे हैं। दूसरी बात, विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 55 में कहा गया है कि कंपनी ग्राहकों को सही मीटर के ज़रिए ही बिजली वितरित करेगी, और ग्राहकों को भी सही मीटर से बिजली प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है। तो फिर मौजूदा डिजिटल मीटर क्यों बदले जाएँगे? जबकि इनमें कोई खराबी नहीं है और इस मीटर का भुगतान उपभोक्ता द्वारा किश्तों में किया जा चुका है। तीसरा, ये मीटर केंद्र सरकार की रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के तहत लगाए जा रहे हैं, जो एक योजना है, कोई कानून नहीं। कोई भी नागरिक सरकार की सभी योजनाओं को मानने के लिए बाध्य नही है। और केंद्र सरकार ने इन मीटरों को लगाने का सिर्फ सुझाव दिया है। ऐसे में, हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि हमने इस स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लगवाने के लिए आपसे आवेदन नहीं किया था। धरने को सम्बोधित करते हुये वक्ताओं ने कहा कि सरकार बिजली जैसे सेवा क्षेत्र को बड़े बड़े उद्योगपतियों के मुनाफे के लिए प्राइवेट हाथों में दे रही है। आज केंद्र व राज्य सरकार लोगों को लूटने के लिए जबरदस्ती ये मीटर लगा रही है पूरे देश में इसका विरोध हो रहा है लेकिन सरकारें आम जनता की चिंता छोड़कर कम्पनियों की सेवा में जुटी हुई हैं। हम इस नीति को वापस किये बगैर चैन से नहीं बैठेगें। इस महाधरना में राकेश मिश्रा, नरेंद्र भदौरिया, लोकेश शर्मा, आलोक नायक, मनीष श्रीवास्तव, रवि शर्मा बंजारा, आनंद सक्सैना , वीरेंद्र शर्मा, के पी सिंह, शेखर बशिष्ठ, हरिशंकर विययवर्गीय, वीरेंद्र पांडेय, सेवाराम नौरोजी मनोज रजक, राधेश्याम चंदेल, विकास बंसल, शोभना श्रीवास्तव, श्रीराम सेन, देवेंद्र सेन,आदित्य शर्मा,महेंद्र नायक शुभम राव, डा पुष्पराग, रमेशचंद्र शर्मा,नरेंद्र कुशवाह, आदि शामिल हुये और सम्बोधित किया।
