
मछुआ सहकारी समिति के सदस्यों ने लगाया आरोप, अन्य वर्गों के लोगों को लाभ देने विभाग कर रहा पक्षपात
कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार, निष्पक्ष जांच व कार्यवाही की मांग
बालाघाट। मत्स्य विभाग कार्यालय से करीब दो दर्जन ग्रामीणों के जाति प्रमाण पत्र गायब हो गए हैं। मछुआ सहकारी समिति के सदस्यों ने आारेप लगाया है कि अन्य वर्गों के लोगों को लाभ देने के लिए विभाग पक्षपात कर रहा है। मंगलवार को जिला मुख्यालय पहुंचे मछुआ सहकारी समिति बोरी के ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट और मत्स्य विभाग कार्यालय केसामने प्रदर्शन किया। वहीं कलेक्टर से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्यवाही किए जाने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार लालबर्रा विकासखंड की राजीव गांधी मछुआ सहकारी समिति बोरी, मिलन मछुआ सहकारी समिति टेकाड़ी, मत्स्य सहकारी समिति पांढरवानी और मालगोंदी—के अपात्र एवं अक्रियाशील सदस्यों का निष्कासन करने के लिए कलेक्टर ने जिला एवं ब्लॉक स्तरीय छानबीन समिति का गठन किया था। ब्लॉक स्तरीय समिति में उपसंचालक मत्स्योद्योग बालाघाट, नायब तहसीलदार लालबर्रा, सहकारिता निरीक्षक लालबर्रा और समिति के दो मनोनीत सदस्यों को शामिल किया गया था। इस दौरान ब्लॉक समिति के पदाधिकारियों ने लालबर्रा तहसीलदार के माध्यम से समिति सदस्यों से जाति प्रमाण पत्र जमा कराने के निर्देश दिए थे। सभी ग्रामीणों ने अपने-अपने जाति प्रमाण पत्र जमा कर दिए, लेकिन जांच के समय करीब दो दर्जन ग्रामीणों के प्रमाण पत्र विभाग से गायब पाए गए। मछुआरों का आरोप है कि मछुआ समितियों से अन्य समाज के लोगों को समिति से अलग करने के लिए शिकायत की गई थी। जिसकी जांच में मत्स्योद्योग उपसंचालक ने फर्जीवाड़ा किया है। जिन्होंने जांच समिति के सामने जाति प्रमाण पत्र पेश किए थे। उनका जाति प्रमाण गायब करने के साथ ही नाम भी हटा दिया गया है, जबकि उनके पास जाति प्रमाण पत्र जमा किए जाने की रिसिविंग मौजूद है।
जांच प्रतिवेदन में केवल सहायक संचालक के हस्ताक्षर
समिति सदस्यों ने छानबीन समिति की जांच में सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि जब ब्लॉक स्तरीय समिति में पांच सदस्यों को शामिल किया गया था तो जांच प्रतिवेदन में पांचों सदस्यों के हस्ताक्षर होना था लेकिन प्रतिवेदन में केवल सहायक संचालक पूजा रोडगे के ही हस्ताक्षर है। इससे स्पष्ट होता है कि मत्स्य विभाग के अधिकारी समिति सदस्यों को लाभ न देते हुए अन्य लोगों को लाभ पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मछुआरों ने मांग की थी कि मत्स्य नीति के तहत मत्स्यपालन और आखेट करके जीविकोपार्जन करने वाले मछुआ जाति के लोगों को ही समिति में रखा जाए। अन्य जाति के लोगों को समिति से बाहर किया जाए। जिसकी जांच के लिए उपसंचालक मत्स्योद्योग ने 6 अगस्त को नायब तहसीलदार लालबर्रा, मत्स्य निरीक्षक, सहकारिता निरीक्षक, क्षेत्रीय मछुआ प्रतिनिधि महेश मेश्राम और सोहनलाल बाउके को शामिल किया था। जिसकी 13 अगस्त को की गई जांच का गत दिवस प्रतिवदेन सामने आया। उसमें उपसंचालक मत्स्योद्योग के अध्यक्ष के तौर पर नाम आने पर, मछुआरों ने नाराजगी जाहिर की है।
कलेक्ट्रेट, मत्स्य विभाग कार्यालय के सामने किया प्रदर्शन
जिला मुख्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने मंगलवार को अपनी जायज मांगों को लेकर सुनवाई नहीं होने पर मत्स्य कार्यालय और कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि अन्य जाति के लोगों को लाभ देने के लिए उन्हें समिति से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। समिति में शामिल सोहनलाल बाउके के अनुसार छानबीन समिति की जांच में सामने आया कि समिति के कई लोगों ने जाति प्रमाण पत्र पेश नहीं किए, जबकि मछुआ समाज के लोगों ने जाति प्रमाण पत्र जमा किए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब मत्स्योद्योग उपसंचालक के ईशारे पर किया गया है।
