
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पड़ोसियों के बीच बहस या हाथापाई जैसी घटनाएं आईपीसी की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने के दायरे में नहीं आतीं। न्यायमूर्ति बी।वी। नागरत्ना और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने एक मामले की सुनवाई करते समय यह फैसला सुनाया। दरअसल पीठ एक मामले में सुनवाई कर रही थी, जिसमें एक महिला ने अपनी पड़ोसी के साथ बहस की थी, जिसमें उसे कर्नाटक हाई कोर्ट ने 3 साल की सजा सुनाई थी।
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि आईपीसी की धारा 306 लागू करने के लिए यह आवश्यक है कि आरोपी ने आत्महत्या के लिए पीड़ित को उकसाया हो, सहायता की हो या उसे आत्महत्या के लिए प्रेरित किया हो।
पीठ ने कहा, हालांकि अपने पड़ोसी से प्रेम करो एक अच्छी बात है, लेकिन पड़ोस में झगड़े समाज के लिए कोई नई बात नहीं हैं। ऐसे झगड़े सामुदायिक जीवन में आम हैं। सवाल यह है कि क्या तथ्यों के आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला बनता है?
पीठ ने कहा, ऐसे झगड़े रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं, और तथ्यों के आधार पर हम यह नहीं कह सकते कि अपीलकर्ता द्वारा ऐसा कोई कृत्य हुआ, जिससे पीड़िता को आत्महत्या के अलावा कोई और रास्ता न दिखा हो।
