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दमोह ।सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन कथा व्यास किशोरी जी ने विभिन्न प्रसंगों पर प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष के दौरान सातवें दिन की श्रीमद् भागवत कथा का मुख्य महत्व पितरों के उद्धार और मोक्ष की प्राप्ति है. इस अवधि में यह कथा सुनने से पितर प्रसन्न होते हैं और उन्हें जीवन-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल सकती है. कथा के सातवें दिन का संबंध भगवान कृष्ण की लीलाओं से होता है, और इसे सुनने से व्यक्ति के सभी पापों से मुक्ति मिलती है ,किशोरी जी ने कहा इस कथा को सुनने से पितर बहुत प्रसन्न होते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है, जैसा कि भगवान शिव ने पार्वती जी को बताया है।

पितृपक्ष में यह कथा सुनने से पितृ दोष समाप्त हो जाता है. शास्त्रों के अनुसार, लगातार सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिलती है और बैकुंठ का फल प्राप्त होता है. सातवें दिन भगवान कृष्ण की विभिन्न लीलाओं का वर्णन किया जाता है.  इसमें सुदामा चरित्र और सुदामा तथा कृष्ण की मित्रता का प्रसंग भी बताया जाता है. यह दिन पितरों के उद्धार और कल्याण के लिए संकल्पित होता है. व्यक्ति के पापों से मुक्ति मिलती है और उन्हें शुद्ध आत्मा प्राप्त होती है।कथा ब्यास  किशोरी वैष्णवी गर्ग जी ने सातवें दिन कृष्ण के अलग-अलग लीलाओं का वर्णन किया। मां देवकी के कहने पर छह पुत्रों को वापस लाकर मां देवकी को वापस देना सुभद्रा हरण का आख्यान कहना एवं सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए किशोरी जी  ने बताया कि मित्रता कैसे निभाई जाए यह भगवान श्री कृष्ण सुदामा जी से समझ सकते हैं।उन्होंने कहा कि सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र से सखा सुदामा मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे। उन्होंने कहा कि सुदामा द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढ़ने लगे द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं इस पर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है। अपना नाम सुदामा बता रहा है जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना प्रभु सुदामा सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे सामने सुदामा सखा को देखकर उन्होंने उसे अपने सीने से लगा लिया। सुदामा ने भी कन्हैया कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया दोनों की ऐसी मित्रता देखकर सभा में बैठे सभी लोग अचंभित हो गए। कृष्ण सुदामा को अपने राज सिंहासन पर बैठाया हुआ। उन्हें कुबेर का धन देकर मालामाल कर दिया। जब जब भी भक्तों पर विपदा आ पड़ी है। प्रभु उनका तारण करने अवश्य आए हैं।कथा व्यास किशोरी जी ने कहा कि जो भी भागवत कथा का श्रवण करता है उसका जीवन तर जाता है।

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