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कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत से प्रबंधन सकते में, जांच में जुटा विभाग
मुक्की परिक्षेत्र के मवाला बीट में मिला नर बाघ का शव ……मुंडीदादर बीट में मिले हैं दो मादा शावकों के शव
तीनों बाघों के शव का एनटीसीए के दिशा-निर्देशों के तहत किया अंतिम संस्कार

बालाघाट। विश्व प्रसिद्ध मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में दो अलग-अलग स्थानों पर तीन बाघों के शव मिले हैं। जिसमें दो मादा शावक और एक नर बाघ का शव शामिल है। कान्हा नेशनल पार्क के मुक्की परिक्षेत्र के मवाला बीट के कक्ष क्रमांक 164 में नर वयस्क बाघ का शव मिला है। जबकि मुंडीदादर बीट के कक्ष क्रमांक 119 से 2 मादा बाघ शावकों के शव मिले है। तीन बाघों के शव मिलने से पार्क प्रबंधन सकते में है। खबर मिलते ही अधिकारी मौके पर पहुंचे। आवश्यक कार्यवाही कर तीनों शव को बरामद किया। एनटीसीए प्रोटोकॉल के तहत उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। फिलहाल पार्क प्रबंधन ने इस मामले को जांच में लिया है।


जानकारी के अनुसार कान्हा टाइगर रिजर्व में 2 अक्टूबर को दो अलग-अलग घटनाओं में बाघों की मृत्यु हुई है। इन घटनाओं में वन विभाग द्वारा त्वरित कार्यवाही की गई और आवश्यक कदम उठाए गए। कान्हा टाइगर रिजर्व के उपसंचालक ने बताया कि 2 मादा बाघ व 01 नर बाघ की मौत हुई है। दोनों घटनाओं में एनटीसीए नई दिल्ली और कार्यालय मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक, मध्यप्रदेश, भोपाल के दिशा-निर्देशों के अनुसार त्वरित कार्यवाही की गई। वन अपराध प्रकरण दर्ज कर अग्रिम कार्यवाही जारी है। क्षेत्र संचालक रवीन्द्र मणि त्रिपाठी के निर्देशन में वन विभाग द्वारा आवश्यक कदम उठाए गए और घटनाओं की जांच की जा रही है।
शवों का पोस्टमार्टम डॉ. संदीप अग्रवाल वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी और डॉ. आशीष वैध पशु चिकित्सक द्वारा किया गया। शवदाह, भस्मीकरण की कार्यवाही क्षेत्र संचालक, उपसंचालक, सहायक संचालक, और अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में की गई। एनटीसीए नई दिल्ली द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्यवाही की जा रही है। एनटीसीए के प्रतिनिधि शिवांगी बेंद्रे घटनास्थल पर उपस्थित थे और उन्होंने आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
शावकों की मौत बाघ के हमले से होने की संभावना
कान्हा नेशनल पार्क के 9 नंबर रोड पर दो से तीन महीने की दो मादा बाघ शावकों की मौत हुई। पार्क के मुण्डीदादर बीट के कक्ष क्रमांक 119 से दोनों मादा बाघ शावकों के शव बरामद किए गए है। स्थानीय हाथी गश्ती दल द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार शावकों की मृत्यु नर बाघ के हमले के कारण हुई प्रतीत होती है। घटना स्थल को सुरक्षित कर डॉग स्कवायड की सहायता से छानबीन की गई और पोस्टमार्टम के बाद शवदाह, भस्मीकरण की कार्यवाही की गई। फिलहाल पार्क प्रशासन स्थिति की निगरानी कर रहा है और उच्च अधिकारियों को पूरी जानकारी भेज दी गई है।


आपसी संघर्ष में हुई नर बाघ की मौत
कान्हा नेशनल पार्क के मुक्की परिक्षेत्र के अंतर्गत मवाला बीट के कक्ष क्रमांक 164 में एक नर बाघ की मृत्यु हुई है। पार्क प्रबंधन से प्राप्त जानकारी के अनुसार गश्ती दल द्वारा प्रत्यक्ष रूप से एक नर बाघ पर दूसरे बाघ द्वारा हमला करते हुए देखा गया, जिसके कारण एक नर बाघ की मृत्यु हो गई। घटना स्थल को सुरक्षित कर पोस्टमार्टम और शवदाह, भस्मीकरण की कार्यवाही की गई। जानकारों की मानें तो बाघों में आपसी संघर्ष आमतौर पर सहवास या क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर होता है। नर बाघ अक्सर अपने इलाके की रक्षा के लिए दूसरे बाघों से संघर्ष करते हैं। वहीं, कभी-कभी शावकों को भी नर बाघ मार डालते हैं। ताकि मादा बाघ पुन: सहवास के लिए तैयार हो सके।


बाघ संरक्षण की दृष्टि में बड़ी क्षति
कान्हा टाइगर रिजर्व बाघों के संरक्षण के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है और यहां बाघों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी गई है। लेकिन एक साथ तीन बाघों की मौत ने पार्क प्रबंधन और पर्यावरण प्रेमियों को झकझोर दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह घटना वन्य जीवन के स्वाभाविक व्यवहार का हिस्सा है, लेकिन फिर भी यह बाघ संरक्षण की दृष्टि से बड़ी क्षति है। कान्हा में हुई इस घटना ने एक बार फिर बाघों के रहन-सहन और उनके संघर्षपूर्ण जीवन की झलक सामने रखी है।

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