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दमोह। विजयदशमी पर्व दशहरा को सारे राष्ट्र में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया । इस पर्व को शौर्य और शक्ति के पूजन के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। अस्त्र – शस्त्रों का पूजन का विशेष महत्व परंपरा में स्थापित है। वीर क्षत्राणि समिति, जिला राजपूत क्षत्रिय महासभा दमोह के तत्वाधान में राजपूत समाज के भवन में परंपरागत शस्त्र पूजन एवं क्षत्राणि मिलन कार्यक्रम संपन्न हुआ। मां दुर्गा की आराधना एवं तलवार और कटारों का पूजन करने के उपरांत कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती मैत्री सिंह राजपूत ने समाज की महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा की, शक्ति पूजन का आशय यही है की महिलाओं को स्वयं में आत्मनिर्भर और सशक्त बनना चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि वह शिक्षित हों।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं पूर्व विधायक एवं समाज की वरिष्ठ मार्गदर्शक श्रीमती स्नेह सलिला हजारी ने कहा की, समाज की हर बेटी को उच्च शिक्षा ग्रहण कर राष्ट्र को समर्पित नई पीढ़ी तैयार करने में अपना योगदान देना चाहिए।राष्ट्र रक्षा ही क्षत्रिय धर्म है। विशिष्ट अतिथि सुमन हजारी ने शुभकामनाएं देते हुए कहा,कि बदले हुए प्रवेश में हमें सामंजस्य से बैठकर श्रम का और समाज के विकास में अपना योगदान देना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन कर रहीं संस्था अध्यक्ष मंजु राजपूत ने कहा कि इतिहास के पन्नों पर अपने खून से इबारत लिखने वालों में राजपूत महिलाएं भी पीछे नहीं रहीं, वह आगे भी देश भक्त पीढ़ियां तैयार करती रहेंगी।

इसी तरह के विचार नर्मदा सिंह, सुषमा चौहान और संगीता प्रभात सिंह ने व्यक्त किये । आभार चित्रा सिंह ने व्यक्त किया। द्वितीय चरण में छात्राणियों ने तलवार को अपने- अपने माथे से लगाकर बारी-बारी से शौर्य का प्रदर्शन किया। समाज की कुछ मातृ शक्तियों ने परंपरागत राजपूती घूमर प्रस्तुत कर अपने उल्लास और परंपरा का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर, आभा राजपूत,श्रद्धा राजपूत, वंदना परिहार, कविता परिहार, नीतू परिहार, वैजयंती धन सिंह राजपूत, संगीता लक्ष्मण सिंह, संध्या परिहार, कांति हजारी, साधना सिंह, रचना सिंह, रेखा सिंह, कीर्ति राजपूत, वैजयंती परिहार, दीपिका परिहार, की विशेष उपस्थिति रही।

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