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डीआईजी ने काली कमाई व सोना सोफे और क्रॉकरी की अलमारी में छिपाया था
चंडीगढ़। रिश्वत लेने के मामले में फंसे पंजाब पुलिस के डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर की पहली रात चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल में बहुत मुश्किल से कटी। जेल में उन्हें बूढ़ा बैरक में रखा गया है। यह वह बैरक है जहां 50 साल की उम्र वाले और अच्छे आचरण वाले बंदी और कैदियों को रखा जाता है। भुल्लर की पहली रात बेचैनी में गुजरी। उन्हें सोने के लिए जमीन पर गद्दा लगाकर दिया और एक तकिया भी। इसी बैरक में हिमाचल प्रदेश के आईजी रहे जाहूर जैदी और कोर्ट में अपने दामाद की गोलियां मारकर हत्या करने वाले पंजाब के पूर्व एआईजी मालविंदर सिंह सिद्धू भी बंद हैं। भुल्लर के साथ पकड़े गए उनके बिचोलिए कृष्णु को अलग बैरक में रखा है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डीआईजी भुल्लर ने काली कमाई को सोफे और क्रॉकरी की अलमारी में छिपा रखा था। भुल्लर की चंडीगढ़ के सेक्टर-40 वाली कोठी से सीबीआई को 7.5 करोड़ नगद मिले। सामान की आलमारियों में सोना छिपाकर रखा था। महंगी शराब का जखीरा लुधियाना के समराला में स्थित फार्म हाउस से मिला। यहां शराब की 108 बोतलें बरामद की गई हैं।
चंडीगढ़ सीबीआई कोर्ट में पेश होने के दौरान भुल्लर ने कहा था कि सभी आरोप झूठे हैं, जिन्हें वह अदालत में साबित करेंगे। कोर्ट इंसाफ करेगा। हर चीज का जवाब देंगे। मेरे पास वह केस ही नहीं था। मैं कौन होता हूं रिश्वत मांगने वाला। हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार और सीबीआई को आदेश दिया है कि कारोबारी को सुरक्षा दी जाए। भुल्लर के खिलाफ रिश्वत लेने की शिकायत देने वाले स्क्रैप कारोबारी आकाश बत्ता ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसमें उन्होंने अपनी जान को खतरा बताया और कहा कि पंजाब पुलिस उन्हें झूठे मामले में फंसा सकती है क्योंकि उन्होंने एक बड़े अफसर को रिश्वत मामले में पकड़वाया है।

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