
इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के बीच हुआ समझौता
नई दिल्ली। अब ईपीएफओ के पेंशनधारकों को हर साल बैंक या दफ्तर जाकर जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की जरूरत नहीं होगी। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के बीच एक समझौता हुआ है जिसके तहत पेंशनधारकों को अब घर बैठे डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र की सुविधा मिलेगी। इस नई व्यवस्था के तहत इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक अपने देशभर में फैले 1.65 लाख डाकघरों और तीन लाख से ज्यादा डाक कर्मचारियों के नेटवर्क का इस्तेमाल करेगा। ये सभी बैंकिंग उपकरणों से लैस हैं, जिनसे चेहरे की पहचान और फिंगरप्रिंट बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के जरिए पेंशनधारक अपना डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकेंगे।
पहले पेंशनधारकों को हर साल बैंक या ईपीएफओ ऑफिस जाकर प्रमाण पत्र देना होता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया डिजिटल कर दी गई है। अब पेंशनधारक अपने घर पर ही ऑनलाइन वेरिफिकेशन करा सकेंगे, जिससे कागज और समय दोनों की बचत होगी।
ईपीएफओ के 73वें स्थापना दिवस पर आईपीपीबी के सीईओ आर विश्वेश्वरन और ईपीएफओ के केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त रमेश कृष्णमूर्ति ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। खास बात यह है कि डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जारी करने का पूरा खर्च ईपीएफओ उठाएगा यानी यह सेवा सभी पेंशनधारकों के लिए पूरी तरह निःशुल्क होगी।
इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक ने साल 2020 में ही आधार-आधारित बायोमेट्रिक सिस्टम से डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र की होम सर्विस शुरू कर दी थी। अब ईपीएफओ के साथ जुड़ने के बाद यह सेवा देशभर के करोड़ों पेंशनधारकों तक पहुंच जाएगी।
पेंशनधारकों को बस अपने पास के डाकघर या अपने क्षेत्र के डाकिया या ग्रामीण डाक सेवक से संपर्क करना होगा। इसके बाद वे आधार नंबर और पेंशन से जुड़े डिटेल्स देंगे, जिससे फेस ऑथेंटिकेशन या फिंगरप्रिंट बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के जरिए जीवन प्रमाण पत्र तुरंत जारी किया जा सकेगा। आईपीपीबी के सीईओ विश्वेश्वरन ने कहा कि यह साझेदारी भारत के हर घर तक वित्तीय और नागरिक सेवाएं पहुंचाने के मिशन को और मजबूत करेगी। इस पहल से न सिर्फ वरिष्ठ नागरिकों को राहत मिलेगी, बल्कि डिजिटल इंडिया अभियान को भी नई गति मिलेगी।
