
घनिष्ठ संबंध आत्महत्या दुष्प्रेरण का आधार नहीं
जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति गुरपाल सिंह अहलूवालिया की एकलपीठ ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि घनिष्ठ संबंध आत्महत्या के लिए उकसाने की श्रेणी में नहीं आता है। लिहाजा, पुलिस द्वारा दर्ज एफआइआर को निरस्त करने व अदालत में जारी प्रकरण समाप्त करने का आदेश सुनाया जाता है।याचिकाकर्ता दमोह निवासी पुष्पेंद्र उर्फ कल्लू गौतम की ओर से पक्ष रखा गया। दलील दी गई कि उसके विरुद्ध आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने की धारा अंतर्गत अपराध कायम किया गया है। वह एफआइआर अनुचित होने के कारण निरस्त करने का आदेश अपेक्षित है। होमगार्ड कर्मी मदन डिम्हा ने सल्फास का सेवन कर लिया था। होमगार्ड कर्मी को शराब के नशे में उपचार लिए चार अक्टूबर, 2023 को अस्पताल ले जाया गया था। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी। मृतक का उसके ससुर के घर पर आना-जाना था। मृतक उसके दामाद को चाचा तथा उसके बच्चों को भाई-बहन मानता था। ससुर की बेटी से अवैध संबंध का आरोप लगाते हुए उसने होमगार्ड कर्मी को फोन पर धमकाया था। अवैध संबंध के बारे में समाज को बताने के अलावा नौकरी से हटवा देने की धमकी भी दी थी। इस संबंध में होमगार्ड कर्मी ने अपनी पत्नी को बताया था। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश का हवाला देते हुए अपने आदेश में कहा है कि उक्त मामला आत्महत्या के लिए उकसाने की श्रेणी में नहीं आता है।
