
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री का मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) को निर्देश दिया कि अपील में देरी माफ करने की अर्जी पर अपना ऑब्जेक्शन तीन हफ्ते में दाखिल करें। यह अपीलें सीआईसी के 2016 के उस फैसले को चुनौती देती हैं, जिसमें मोदी की डिग्री की जानकारी सार्वजनिक करने का आदेश दिया गया था।
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने सुनवाई की। अपीलकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील शादान फरासत ने दो मुख्य मुद्दे उठाए। पहला, क्या आरटीआई एक्ट की धारा 8 के तहत डिग्री की जानकारी छिपाई जा सकती है। दूसरा, क्या इस सार्वजनिक करना बड़े जनहित में है। कोर्ट ने नोट किया कि अपीलें देरी से दाखिल हुई हैं। डीयू की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वे देरी और मामले की योग्यता दोनों पर विस्तृत जवाब देने वाले है। बेंच ने कहा, ऑब्जेक्शन दाखिल करें। अपीलकर्ताओं को जवाब के लिए दो हफ्ते का समय मिलेगा। अगली सुनवाई 16 जनवरी 2026 को होगी।
25 अगस्त 2024 को जस्टिस सचिन दत्ता ने सीआईसी के दिसंबर 2016 के फैसले को रद्द कर दिया। सीआईसी ने डीयू को 1978 के सभी बीए पास छात्रों के रिकॉर्ड दिखाने का आदेश दिया था, जिसमें पीएम मोदी भी शामिल थे। जज ने कहा कि डिग्री और मार्कशीट निजी जानकारी हैं। इन्हें आरटीआई की धारा 8(1)(जे) के तहत संरक्षित रखा जाएगा। बिना बड़े जनहित के खुलासा नहीं हो सकता। यूनिवर्सिटी और छात्र का रिश्ता विश्वास पर आधारित है। थर्ड पार्टी को रिकॉर्ड दिखाना गोपनीयता का उल्लंघन होगा।
