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रिटायरमेंट 23 नवंबर को, जस्टिस सूर्यकांत 24 को लेंगे शपथ
नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा, कि बौद्ध धर्म का पालन करता हूं, लेकिन मैं धर्मनिरपेक्ष हूं और सभी धर्मों में विश्वास करता हूं। सीजेआई गवई ने इस आशय की बात सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन द्वारा आयोजित विदाई समारोह में कही। सीजेआई गवई 23 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं।
यहां उन्होंने कहा, कि हालांकि, मैंने किसी धर्म का गहराई से अध्ययन नहीं किया और बौद्ध पृष्ठभूमि का होने के बावजूद मैं धर्मनिरपेक्ष हूं। सभी धर्मों हिंदू, सिख, ईसाई और इस्लाम धर्म में विश्वास करता हूं। स्कौरा द्वारा गुरुवार को आयोजित विदाई समारोह में बोलते हुए सीजेआई गवई ने कहा, मैंने यह सब पिता से सीखा, क्योंकि वे डॉ. आंबेडकर में विश्वास करते थे। उन्हें कोई एक दरगाह के बारे में बताया करता था, और हम भी वहां जाया करते थे। इसी के साथ उन्होंने अपने जीवन में बाबा साहब डॉ. बीआर आंबेडकर और संविधान के महत्व को स्वीकारते हुए कहा, मैं आज जो कुछ भी हूं, इस संस्था की बदौलत हूं, इसलिए हमेशा ही इसके प्रति कृतज्ञ रहूंगा।
मुख्य न्यायाधीश केंद्रित न हो सुप्रीम कोर्ट
यहां जस्टिस गवई ने मुख्य न्यायाधीश की भूमिका को लेकर कहा, कि सुप्रीम कोर्ट मुख्य न्यायाधीश पर केंद्रित नहीं होना चाहिए, बल्कि सभी न्यायाधीशों पर केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट एक महान संस्था है और सभी न्यायाधीशों, बार एसोसिएशन, रजिस्ट्री और कर्मचारियों जैसे समस्त हितधारकों की भागीदारी से ही न्यायालय कार्य करता है।
जस्टिस सूर्यकांत बोले- हम 20 साल से हैं दोस्त
विदाई समारोह में जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, कि हम लोगों का जुड़ाव पुराना है। भावी मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, जस्टिस गवई से 24 मई, 2019 से जुड़ाव नहीं है, बल्कि जब हमने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में एक साथ शपथ ली थी तब से हम जुड़े हैं। उन्होंने कहा, एक-दूसरे को हम दो दशकों से जानते हैं। हमारी दोस्ती की बहुत प्यारी यादें भी हैं। गौरतलब है कि सीजेआई गवई 23 को पद से रिटायर होंगे और 24 नवंबर को सूर्यकांत आगमी सीजेआई की शपथ ग्रहण करने वाले हैं।

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