
डीजीपी ने सभी एसपी को लिखा- एक बार में भेंजे आरोपी की अपराधिक जानकारी
भोपाल । मप्र उच्च न्यायालय ने पुलिस की अधूरी और भ्रमित करने वाली अपराधियों से जुड़ी जानकारी पर सख्त नाराजगी जताई है। अदालत ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया है कि अब पूरे प्रदेश में अदालतों को भेजी जाने वाली सभी आपराधिक रिपोर्टें पूर्ण, अद्यतन और स्पष्ट रूप से केस के परिणाम सहित भेजी जाएं। उच्च न्यायालय ने यह आदेश बैतूल के आबकारी प्रकरण से जुड़ी सुनवाई के दौरान दिया।
दरअसल, बैतूल निवासी विजय अतुलकर को आबकारी मामले में एक साल की सजा हुई। इसके खिलाफ उन्होंने उच्च न्यायालय में अपील की। पुलिस द्वारा पूरी अपराधिक जानकारी नहीं भेजने की वजह से 3 महीने तक उनकी जमानत नहीं हो पाई और जेल में रहना पड़ा। बाद में पुलिस ने अदालत में बताया कि आरोपी पर 9 आपराधिक मामले दर्ज हैं। जबकि बचाव पक्ष ने बताया कि पुलिस ने जानबूझकर अधूरी जानकारी दी है। याचिकाकर्ता पहले ही आबकारी के पांच मामलों में बरी हो चुका है। न्यायमूर्ति अवनिन्द्र कुमार सिंह ने टिप्पणी में कहा कि अधूरी क्रिमिनल रिपोर्ट न केवल न्याय प्रक्रिया में बाधा है, बल्कि आरोपी के संविधान प्रदत्त अनुच्छेद 21 के अधिकार का हनन भी है। अदालत ने माना कि ऐसी त्रुटियां जमानत मामलों में अनावश्यक देरी का कारण बनती हैं और न्याय प्रणाली पर अवांछित बोझ बढ़ाती हैं। इसी आधार पर उच्च न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया कि वे सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को आदेश जारी करें कि भविष्य में न्यायालय या सरकारी वकील द्वारा मांगी गई किसी भी क्रिमिनल रिपोर्ट में सभी मामलों का पूरा विवरण, लंबित व निपट चुके मामलों के परिणाम सहित दर्ज किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘परिणाम ज्ञात नहीं’ जैसी दलील अस्वीकार्य है, क्योंकि न्यायालय मोहारीर रोज़ाना केस परिणाम पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर कार्यालय भेजते हैं।
