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ढांक और शंख के धुनों पर होगा गौरीघाट में माँ का विसर्जन
जबलपुर। बंगभाषियों की प्राचीन संस्था सिद्धी बाला बोस लाईब्रेरी एसोसिएशन, सिटी बंगाली क्लब करमचंद चौक में ‘‘बासंती पूजा’’ के दिन माँ सिद्धीदात्री की पूजन-अर्चन की गई। ऐसा माना जाता है कि माँ दुर्गा के नौवे रूप माँ सिद्धी की पूजा नवरात्र के नौवें दिन की जाती है। माँ सिद्धीदात्री की आराधना से भक्तों को सिद्धियां प्राप्त होती हैं। जिससे लोगों को बुरे कार्यों से लड़ने की शक्ति प्राप्त होती है। नवमीं पूजा के दिन आज कुमारी पूजन का भी आयोजन किया गया और कुम्डहे की बली दी गई। सिटी बंगाली क्लब में नवमीं पूजन के साथ पुष्पांजली, प्रसाद, भोग का वितरण किया गया।
इस मौके पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने माँ के दरबार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और अपने परिवार में सुख-शांति एवं समृद्धि स्थापित रहे ऐसा वर मांगा।
बंगभाषियों द्वारा विसर्जन आज…..
सिटी बंगाली क्लब में आज दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन दोपहर 3.30 बजे संस्था के प्रांगण करमचंद चौक से गौरीघाट के लिए प्रस्थान करेगी। संस्था के अध्यक्ष सुब्रत पाल, और सचिव प्रकाश शाह ने बताया कि शारदेय नवरात्र में बंगभाषियों द्वारा नौ दिनों तक वांसती दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है, एवं माँ के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। विसर्जन के पहले बंग समाज की महिलायें माँ को मिठाई खिलाकर एवं सिंदूर लगाकर अपने सुहाग की लम्बी उम्र एवं परिवार में सुख-शांति रहने हेतु कामना करतीं हैं, इसके पश्चात् माँ को ढाक एवं शंख की ध्वनि पर विदाई दी जाती है।

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