

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अरुंधति रॉय की नई किताब मदर मैरी कम्स टू मी की बिक्री और प्रचार पर रोक लगाने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज किया है। याचिकाकर्ता ने किताब के कवर पेज पर अरुंधति रॉय को सिगरेट पीते हुए दिखाए जाने पर आपत्ति जाहिर की थी। यह सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003 (सीओटीपीए, 2003) का उल्लंघन है और धूम्रपान को बढ़ावा देता है, जबकि कानून के अनुसार चेतावनी के बिना इसतरह के चित्र का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका खारिज की। अदालत ने कहा कि अरुंधति रॉय एक जानी-मानी लेखिका हैं और उन्होंने किसी भी प्रकार से धूम्रपान का प्रमोशन नहीं किया है।
किताब में आवश्यक चेतावनी भी मौजूद है, और किसी साहित्यिक कृति के कवर पेज को धूम्रपान के प्रचार के बराबर नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के पहले के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसने भी रोक लगाने से मना कर दिया था। यह जनहित याचिका अधिवक्ता राजसिंहन ने दायर की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आपत्ति केवल कवर पर सिगरेट वाले चित्र से थी, क्योंकि यह धूम्रपान को बौद्धिकता और रचनात्मकता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करता है और युवा पाठकों को गुमराह कर सकता है। अदालत ने यह भी माना कि सीओटीपीए, 2003 का नियम (पैकेज पर चेतावनी छापना) विशुद्ध रूप से तंबाकू उत्पादों के पैकेट पर लागू होता है, किताबों पर नहीं।

