
याचिका निरस्त : अवैध प्रवेश की नींव पर डिग्री को नहीं दी जा सकती इजाजत
जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति रामकुमार चौबे की युगलपीठ ने महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा कि बैक डोर से आने वालों को पीछे के दरवाजे से ही जाना होगा। अवैध प्रवेश की नींव पर ली गई डिग्री रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने इस मत के साथ भोपाल के युवक की याचिका निरस्त कर दी। एमबीबीएस करने के बाद गांधी मेडिकल कालेज भोपाल ने याचिकाकर्ता का इंटर्नशिप प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया था। जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी।
कोहेफिजा, भोपाल निवासी सुप्रीत प्रताप सिंह ने यह याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया कि 2010 में पीएमटी पास कर उसने गांधी मेडिकल कालेज, भोपाल से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप भी पूरी की। लेकिन 28 मई 2021 को गांधी मेडिकल कालेज ने उसे कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। नोटिस में कहा गया कि उसने 2010 में पीएमटी परीक्षा अवैध तरीके से पास की थी। उसके विरुद्ध सीबीआई ने धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। इसलिए क्यों न उसका इंटर्नशिप प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया जाए। याचिकाकर्ता ने इसका जवाब दिया, लेकिन 11 अक्टूबर, 2021 को उसका इंटर्नशिप प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया गया। तर्क दिया गया कि पीएमटी परीक्षा देते वक्त वह नाबालिग था। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के निर्देश पर उसने प्रोबेशन अवधि पूरी की थी। जुर्माना भी दिया था। इसलिए उसे जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 के तहत एक नई शुरुआत करने का अधिकार है। राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता मानस मणि वर्मा ने याचिक का विरोध किया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि नई शुरुआत का अर्थ भविष्य से है। लेकिन कानून अवैध रूप से प्रवेश लेकर पूर्ण की गई डिग्री को जारी रखने की अनुमति नहीं देता।
