
जबलपुर। प्रधान जिला न्यायाधीश कृष्णमूर्ति मिश्रा की अदालत ने न्यायाधीशों की निष्पक्षता, ईमानदारी व विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगाने वाला आपत्तिपूर्ण उद्वरणों से भरा हुआ एक आवेदन दो हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए निरस्त कर दिया। कोर्ट ने जुर्माना राशि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अपनी टिप्पणी में कहा कि संपूर्ण न्यायिक व्यवस्था को कलंकित कर उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला इस तरह का आवेदन कदापि स्वीकारणीय नहीं है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बाई का बगीचा, जबलपुर निवासी अनिमेष सिन्हा व विनायक सिंह की ओर से व्यक्त की गई आशंका कि उन्हें पीठासीन अधिकारी से न्याय प्राप्त नहीं हो पाएगा, पूर्णत: काल्पनिक व आधारहीन है। मात्र आशंका, प्रकरण का आधार नहीं हो सकती, इसके लिए न्याय की विफलता की युक्तियुक्त आशंका विद्यमान होनी चाहिए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि आवेदकों ने पीठीसीन अधिकारी पर पूर्णत: मिथ्या व आधारहीन आरोप लगाए हैं और जिला न्यायालय में पदस्थ न्यायिक अधिकारियों यानि व्यवहार न्यायाधीश की निष्पक्षता, ईमानदारी व उनकी विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाकर संपूर्ण न्यायिक व्यवस्था को कलंकित कर उसकी गरिमा को आघात पहुंचाया है। इसलिए प्रस्तुत आवेदन सरहीन होने से जुर्माने सहित निरस्त किया जाता है।
क्या था मामला …
यह मामला शोभापुर, जबलपुर निवासी सुमन श्रीवास्तव की ओर से प्रस्तुत प्रकरण से संबंधित था, जिसमें अनिमेष व विनायक सहित अन्य प्रतिवादी हैं। आवेदिका की आेर से अधिवक्ता शालिनी वी जैन ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि संपत्ति विवाद के प्रकरण में इस तरह के अनुचित उद्धरणों वाला आवेदन कार्रवाई के योग्य है।
जज के विरुद्ध की थी बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी….
जिस आवेदन को दो हजार का जुर्माना लगाकर निरस्त किया गया, उसमें कोट किया गया था कि 1940 के दशक में ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने कहा था-अगर भारत को आज़ादी दी गई, तो सत्ता बदमाशों, धोखेबाज़ों, लुटेरों के हाथों में चली जाएगी; सभी भारतीय नेता घटिया दर्जे के और कमज़ोर लोग होंगे। उनकी ज़बान मीठी होगी और दिल बेवकूफ़ होंगे। वे सत्ता के लिए आपस में लड़ेंगे और भारत राजनीतिक झगड़ों में खो जाएगा। एक दिन ऐसा आएगा जब भारत में हवा और पानी पर भी टैक्स लगेगा। यही नहीं आवेदन में यह भी लिख दिया गया था कि अगर जज को लगता है कि वह प्रापर्टी माफिया और अमीर बिजनेसमैन द्वारा डाले गए दबाव को झेल नहीं पा रहे हैं, तो उन्हें दूसरे फायदेमंद करियर और अपनी मर्ज़ी से इस्तीफा देने के बारे में सोचने के लिए कहा जाना चाहिए।
