Spread the love


किया दोषमुक्त : सत्र न्यायालय ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा

जबलपुर। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विवेक अग्रवाल तथा न्यायाधीश श्री अवनींद्र कुमार सिंह की संयुक्तपीठ ने पुत्री की हत्या के मामले में सत्र न्यायालय द्वारा दी गई उम्र ं कैद की सजा के खिलाफ दायर मृृतिका की आरोपित मां की अपील पर सुनवाई के बाद अपने राहतकारी आदेश में अपीलकर्ता को दोषमुक्त कर दिया।
संयुक्तपीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान मुलताई निवासी ज्योति डोंगरदिये की ओर से दलील दी गई कि अपीलकर्ता की मासूम पुत्री इशिका की कुंए में गिरने से मौत हो गई थी। पांच मार्च, 2023 को जब इशिता कुंए में गिरी, तब उसे बचाने के लिए पीछ े सेे मां ने भी कुंए में छलांग लगा दी थी लेकिन वह पुत्री को बचा नहीं पाई। इसके बावजूद उसके विरुद्ध अपनी ही पुत्री की हत्या का अपराध पंजीबद्ध कर लिया गया। यही नहीं ठोस आधार न होने के बावजूद सत्र न्यायालय ने उसे उम्रकैद की सजा भी सुना दी। सत्र न्यायालय द्वारा दी गई इसी सजाके आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की गई है। संयुक्तपीठ को अवगत कराया गया कि मामले में अभियोजन ने पुत्री की मृत्यु के समय मां के बयान के आधार पर उसे हत्या का दोषी सिद्ध करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी, इसीलिए सजा सुनाई गई। दरअसल, जब पुत्री की मौत हुई, तब मां बदहवास हो गई थी, उसकी मनोदशा ठीक नहीं थी। लिहाजा, उसके बयानों को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए था लेेकिन ऐसा किया गया। उच्च न्यायालय ने पूरे मामले पर गौर करने के बाद उम्रकैद की सजा को अनुचित पाकर निरस्त कर दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *