
दमोह। जिला न्यायालय में न्यायाधीश संतोष कुमार गुप्ता की अदालत ने साइबर सेल की सीडीआर रिपोर्ट एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर हत्या के एक सनसनीखेज मामले में तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया है। प्रकरण में मध्यप्रदेश शासन की ओर से प्रभावी पैरवी शासकीय अभिभाषक (लोक अभियोजक) राजीव बद्री सिंह ठाकुर द्वारा की गई। अभियोजन के अनुसार, दिनांक 25 सितंबर 2023 को चौकी जेरठ, थाना पथरिया में पदस्थ एएसआई राकेश पाठक को सूचना मिली कि सुनार नदी के किनारे एक बोरी संदिग्ध अवस्था में पड़ी है। मौके पर पहुंचकर बोरी खोलने पर उसमें सड़ी-गली अवस्था में एक मानव शव मिला। पहचान न होने पर मृतक की फोटो सोशल मीडिया एवं दैनिक भास्कर में प्रकाशित कराई गई, जिस पर मृतक की पहचान उसकी मां कमला एवं भाई मुकेश प्रजापति ने बबलू प्रजापति के रूप में की। शव पर चोट के निशानों से हत्या की आशंका होने पर थाना पथरिया में अपराध दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान मृतक के मोबाइल नंबर की साइबर सेल से सीडीआर रिपोर्ट प्राप्त हुई, जिससे पता चला कि घटना के दिन मृतक को अंतिम कॉल बुद्दन साहू उर्फ भूपेंद्र साहू (36), निवासी पथरिया ने किया था। पूछताछ में बुद्दन ने बताया कि उसने मृतक को अपने कार्यालय बुलाया था, जहां कलावती एवं कमल पटेल के संबंधों के बारे में जानकारी न देने पर विवाद हुआ। इसी दौरान गणेश प्रजापति (34) एवं नरेश अठ्या (30) के साथ मिलकर मारपीट की गई और गुस्से में आकर बुद्दन ने बबलू का गला दबा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। बाद में शव को सुनार नदी के पुल से नदी में फेंक दिया गया। बुद्दन के कथन के आधार पर अन्य दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी की गई। बुद्दन के कार्यालय से मृतक का मोबाइल, वोटर कार्ड एवं पर्स जब्त किए गए। सीडीआर से यह भी स्पष्ट हुआ कि घटना के समय मृतक और तीनों आरोपी एक ही टावर लोकेशन पर मौजूद थे। मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी न होने के बावजूद अभियोजन ने 18 साक्षी प्रस्तुत किए, जिनमें साइबर सेल की रिपोर्ट निर्णायक रही। बचाव पक्ष की आपत्तियों को खारिज करते हुए न्यायालय ने “अंतिम बार जीवित साथ देखे जाने” के सिद्धांत को लागू किया और कहा कि शव मिलने तथा अंतिम साथ देखे जाने के बीच समयांतराल कम होने पर यह अनुमान स्वाभाविक है कि अपराध आरोपियों द्वारा ही किया गया। सजा: आरोपी बुद्दन साहू को धारा 302 भादंवि में आजीवन कारावास तथा धारा 201 में 4 वर्ष का सश्रम कारावास। आरोपी गणेश प्रजापति एवं नरेश अठ्या को धारा 323 में 6 माह तथा धारा 201 में 4 वर्ष का सश्रम कारावास। तीनों पर कुल 5,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। दोषियों को सजा भुगतने हेतु जेल भेज दिया गया।
