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फरार अधीक्षक मुकेश बर्मन का अब तक सुराग नहीं

जबलपुर। सीजीएसटी विभाग में सामने आए रिश्वतखोरी के गंभीर मामले में फरार चल रहे अधीक्षक मुकेश बर्मन की तलाश में सीबीआई की टीम ने तेज़ी से कार्रवाई की, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल सकी है। सीबीआई ने आधा दर्जन से अधिक संभावित ठिकानों पर सर्च कार्रवाई की, मगर मुकेश बर्मन कहीं नहीं मिला। सीबीआई कार्रवाई के बाद से ही उसका मोबाइल फोन लगातार बंद बताया जा रहा है, जिससे उसकी तलाश और चुनौतीपूर्ण हो गई है।
इधर इस मामले में गिरफ्तार किए गए जीएसटी असिस्टेंट कमिश्नर विवेक वर्मा और इंस्पेक्टर सचिन खरे को सीबीआई ने विशेष न्यायालय में पेश कर पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की थी। विशेष न्यायाधीश रूपेश कुमार गुप्ता की अदालत ने दोनों आरोपियों को 3 दिन की सीबीआई रिमांड पर सौंप दिया है। अब सीबीआई इनसे आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी, ताकि पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट हो सके।
सीबीआई ने जीएसटी असिस्टेंट कमिश्नर विवेक वर्मा और इंस्पेक्टर सचिन खरे को बुधवार को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि जीएसटी रिकवरी से जुड़े एक मामले को रफा-दफा करने और होटल व्यवसायी को राहत देने के बदले अधिकारियों ने रिश्वत की मांग की थी। होटल कारोबारी ने रिश्वत की पहली किश्त के रूप में 4 लाख रुपये इंस्पेक्टर सचिन खरे को सौंपे, इसी दौरान सीबीआई की ट्रैप टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।
शिकायत से ट्रैप तक की पूरी कहानी
मामले की शुरुआत 27 नवंबर 2025 को हुई, जब सतपुरा इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक विवेक त्रिपाठी ने सीबीआई को एक लिखित शिकायत दी। शिकायत में बताया गया कि कंपनी के जबलपुर में चार होटल हैं। वर्ष 2018-19 में उनके एक होटल ‘सुकून सिटी व्यू’ का ओयो कंपनी से करार था, जिससे जुड़ा जीएसटी का मामला जबलपुर सीजीएसटी कार्यालय में लंबित है।
सीजीएसटी विभाग ने होटल को टैक्स बकाया को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया था। विवेक त्रिपाठी का कहना है कि उन्होंने नोटिस के जवाब में होटल से संबंधित सभी दस्तावेज और बैंक स्टेटमेंट पहले ही विभाग को सौंप दिए थे। इसके बावजूद सीजीएसटी इंस्पेक्टर सचिन खरे पर आरोप है कि होटल के खिलाफ मामला बंद करने और पक्ष में आदेश देने के बदले 4 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि इंस्पेक्टर ने वरिष्ठ अधिकारियों से काम करवाने का भरोसा दिलाया था।
शिकायत के बाद सीबीआई ने पूरी योजना के तहत जाल बिछाया। 16 दिसंबर को शिकायतकर्ता सीबीआई कार्यालय पहुंचे और पूरी जानकारी दी। बताया गया कि 15 दिसंबर को उनके सीए हर्षित खंडेलवाल सीजीएसटी कार्यालय गए थे, जहां इंस्पेक्टर सचिन खरे ने 16 दिसंबर की शाम तक भुगतान की व्यवस्था करने को कहा था। इसके बाद 17 दिसंबर की शाम रिश्वत लेते समय सचिन खरे को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया।
फिलहाल सीबीआई फरार अधीक्षक मुकेश बर्मन की तलाश में जुटी हुई है और रिमांड पर लिए गए दोनों अधिकारियों से गहन पूछताछ की जा रही है। माना जा रहा है कि पूछताछ में इस पूरे रिश्वत कांड से जुड़े कई और अहम खुलासे हो सकते हैं।

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