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पुलिस अधीक्षक को सौंपा ज्ञापन

जबलपुर। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ माने जाने वाले पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटे से वायरल हो रहे एक वीडियो ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी जिसमें एक 3 वर्दीधारी पुलिसकर्मीयों द्वारा वरिष्ठ पत्रकार विलोक पाठक को खुलेआम “निपटाने और मारने की धमकी देते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए देखा और सुना जा सकता है। जैसे ही वीडियो सामने आया तभी से ही संस्कारधानी के अनेक सामाजिक धार्मिक साहित्यिक सांस्कृतिक संगठनो,पत्रकार संगठन राष्ट्रीय श्रमजीवी पत्रकार परिषद और सामाजिक संस्थाओं में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया श्रमजीवी पत्रकार परिषद सहित अनेक प्रिंट इलेक्ट्रोनिक पत्रकारो ने इस घटना को लोकतंत्र, प्रेस की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार पर सीधा हमला बताते हुए तीखा विरोध किया और कहाँ की जिन व्यक्तियों पर समाज और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी है, अगर वही पुलिसकर्मी अब बदमाशों की तरह पत्रकारों को डराने-धमकाने और निपटाने लगें तो यह स्थिति लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक है।
पुलिस अधीक्षक को सौंपा ज्ञापन


इस गंभीर मामले को लेकर श्रमजीवी पत्रकार परिषद ने अन्य सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर जबलपुर पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय से मुलाकात कर संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने और निलंबन की मांग की ।
एसपी के साथ बैठक के बाद इसे आगे बढ़ाने हेतु चर्चा कर के डीजीपी तक मामले को बढ़ाया जायेगा ताकि उचित न्याय हो सके।
पुलिसकर्मियों पर निम्न धाराओं के साथ मामले को दर्ज करने की मांग
प्रस्तावित कानूनी धाराएं (BNS, 2023)
​धारा 61 (2) यह धारा अपराधिक षड्यंत्र के लिए है। चूंकि वीडियो में एक से अधिक पुलिसकर्मी मिलकर आपको नुकसान पहुँचाने की योजना बना रहे हैं, इसलिए यह धारा लागू होती है।
​धारा 351 (2) / 351 (3) अपराधिक धमकी के लिए। यदि धमकी जान से मारने की या गंभीर चोट पहुँचाने की है, तो यह धारा प्रभावी होगी।​धारा 62 किसी अपराध के लिए उकसाने या मदद करने के संबंध में।
​धारा 198 जब कोई लोक सेवक किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाने के इरादे से कानून की अवज्ञा करता है।​धारा 201 यदि वे झूठे प्रकरण में फंसाने के लिए फर्जी दस्तावेज या साक्ष्य तैयार करने की बात कर रहे हैं।​धारा 3(5) यदि कई व्यक्ति समान इरादे से कोई कार्य करते हैं।
एक लाइन हाजिर तो दूसरा सस्पेंड
पुलिस अधीक्षक ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए दोनों पुलिस कर्मियों पर तुरंत एक्शन लेते हुए एक को लाइन हाजिर एवं एक को सस्पेंड कर दिया वही fir पर जांच कर शीघ्र ही कार्यवाही करने की बात रखी।

   ये रहे शामिल.......

इस अवसर पर राष्ट्रीय श्रमजीवी पत्रकार परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष परमानन्द तिवारी, राष्ट्रीय सयोजक नलिनकांत वाजपेयी, प्रदेश अध्यक्ष राजेश दुबे, राष्ट्रीय सचिव देव शंकर अवस्थी, कार्य समिति सदस्य उमेश शुक्ला,प्रदेश संगठन महासचिव अनुरोध पटेरिया, प्रदेश महासचिव राजीव उपाध्याय, प्रदेश सचिव संतराम केवड़े, नील तिवारी, कमलेश गुप्ता,एस पी गोस्वामी, लीगल सेल प्रमुख विवेक तिवारी, गुड्डा अग्रवाल,अतुल वाजपेयी, संभागीय अध्यक्ष चंद्रशेखर शर्मा महासचिव रवींद्र शर्मा, प्रवीण नामदेव, कपिल खानेजा, जिला अध्यक्ष सिमरन सिंह शुक्ला, महासचिव अनुराग दिक्षित, शिवकुमार तिवारी, तरुण सोनाने, सुरेश कामले, शंकर विश्वकर्मा शिव चौरसिया सतीश अग्रवाल,नीरज जैन, हर्ष सोनी, अभिषेक सोनी,मृनाल बोरकर, गढ़ा सराफा एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष दीपक सोनी, अनिल तिवारी, अनिल शुक्ला, जितेंद्र वैष्णव,मुकेश मिश्रा, नरेश दुबे,नवनीत दुबे,उत्पलकांत शर्मा,नीरज यादव, फलक कामले,वाजिद खान सहित संस्कारधानी के अनेक वरिष्ठ पत्रकार, इलेट्रिक मिडिया के अनेक प्रतिनिधि एवं महाकौशल विधि छात्र संघ, अधिवक्ता गण,अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, उस्ताद श्री फकीर चंद अखाड़ा,सर्व ब्राह्मण कल्याण परिषद, गढ़ा सराफा एसोसिएशन, के साथ परिषद के समाज कल्याण प्रकोष्ठ, सोशल मीडिया प्रकोष्ठ, प्रकोष्ठ पत्रकार परिवार कल्याण प्रकोष्ठ, साहित्यिक सांस्कृतिक धर्म एवं आध्यात्मिक प्रकोष्ठ, सामाजिक संगठनों के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।


तो होगा व्यापक आंदोलन…..
इस अवसर पर सभी पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि पुलिस प्रशासन द्वारा जल्द और कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह आंदोलन केवल जबलपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के पत्रकार संगठन एकजुट होकर व्यापक आंदोलन करेंगे। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की होगी।फिलहाल सभी की निगाहें पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं, कि वह इस मामले में कितनी संवेदनशीलता और निष्पक्षता दिखाता है।

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