दमोह ! हिंदी भवन के पं रविशंकर सभागृह भोपाल में मध्य प्रदेश हिंदी लेखिका संघ ,भोपाल के द्वारा उनका 31वां वार्षिक उत्सव समारोह कीर्ति पुरस्कार सम्मान समारोह आयोजित किया गया। हिंदी लेखिका संघ की प्रांतीय अध्यक्ष श्रीमती साधना गंगराड़े जी के कुशल नेतृत्व में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री सूर्यकांत नागर वरिष्ठ साहित्यकार इंदौर, प्रमुख अतिथि ड़ाॅ. संतोष चौबे ,कुलाधिपति, रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय ,भोपाल एवं निर्देशक विश्व रंग एवं अध्यक्ष डाॅ,. करुणा सक्सेना प्रांत मंत्री मध्य भारत आ.भा. साहित्य परिषद ग्वालियर रहीं।यह बहुत ही अच्छा सुनियोजित भव्य और गरिमामय कार्यक्रम था। इसमें” डॉ. प्रेमलता नीलम” द्वारा स्थापित “साहित्यश्री पुरस्कार” से “प्रेमलता उपाध्याय स्नेह” की पाॅंचवी कृति “भई ने बिरज की मोर”मैं लिखे गए “अध्यात्मिक पद्यों” के लिए सम्मानित किया गया। “भई ने बिरज की मोर”बुंदेलखंड की कार्तिक परंपरा को अपने आप में संकलित किए हुए एक अद्वितीय कृति है। जिसमें संपूर्ण कार्तिक परंपरा की विधि प्रारंभ से लेकर उद्यापन तक वर्णित है। साथ ही इस पुस्तक में 133 कार्तिक गीत और 30 वाचिक कहानियां (किसा)और सातों वार की सात कहानियां संकलित है। यह पुस्तक कार्तिक स्नान परंपरा वाली स्त्रियों के लिए बहुत ही लाभकारी है। वह एक इस पुस्तक के द्वारा कार्तिक के संपूर्ण मास की पूजन विधि बिना किसी सहायता के कर सकतीं हैं। उनकी इस पुस्तक को पुरस्कृत किए जाने के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं।आप दमोह की वरिष्ठ साहित्यकार हैं। कई वर्षों के अथक प्रयासों से आपकी पांच पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं और 30 से अधिक साझा संग्रह प्रकाशित है। पूर्व में भी आपकी पुस्तक” प्रीत की परछाइयां” जो की एक नवगीत संग्रह है उसे “कादंबरी पुरस्कार” से पुरस्कृत किया गया है। साहित्य के विभिन्न शीर्षकों पर बहुत सारे शोध पत्र आपके द्वारा लिखे गए हैं जो विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित होते रहते हैं। आपको महादेवी वर्मा पुरस्कार ,वीरांगना लक्ष्मीबाई पुरस्कार और अन्य बहुत सारे साहित्यिक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

