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भ्रष्टाचार और 100 करोड़ की संदिग्ध संपत्ति को आधार बनाकर सरकार ने उन्हें साल 2017 में ही अनिवार्य सेवानिवृत्ति (जबरन रिटायर) दे दी थी

कानपुर। विजिलेंस विभाग की कानपुर यूनिट ने वाणिज्य कर विभाग के सेवानिवृत्त एडिशनल कमिश्नर केशव लाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है। यह कार्रवाई उनकी सेवा अवधि के दौरान ज्ञात कानूनी स्रोतों से प्राप्त आय की तुलना में किए गए भारी-भरकम निवेश और बेतहाशा खर्चों के प्रमाण मिलने के बाद की गई है। अगस्त 2023 से चल रही विस्तृत जांच में उनकी कुल संपत्ति 100 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान लगाया गया है, जिसके बाद शासन से अनुमति मिलते ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। रिटायर्ड अधिकारी के घर बाथरुम से लेकर बेडरुम में मिले नोट ही नोट, चौतरफा बिछी थी करंसी
केशव लाल की काली कमाई का खुलासा सबसे पहले साल 2017 में हुआ था, जब वे कानपुर में तैनात थे। उस दौरान आयकर विभाग ने उनके नोएडा सेक्टर-34 स्थित आवास पर छापेमारी की थी। इस छापेमारी के दृश्य बेहद चौंकाने वाले थे; अधिकारियों को उनके घर से 10 करोड़ रुपये की नकदी और करीब 3 करोड़ रुपये के सोने के आभूषण मिले थे। छापेमारी के दौरान नोटों की गड्डियां किसी साधारण जगह नहीं, बल्कि पूजा घर, अलमारियों, बिस्तर के गद्दों और यहां तक कि बाथरूम के फ्लश टैंक के भीतर छिपाकर रखी गई थीं। उस समय वह इस विशाल धनराशि का कोई संतोषजनक स्रोत बताने में पूरी तरह विफल रहे थे।
जांच रिपोर्ट के आंकड़े उनकी अवैध कमाई की पुष्टि करते हैं। केशव लाल की पूरे करियर के दौरान वैध स्रोतों से कुल आय मात्र 1.34 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इसके विपरीत, उनके द्वारा किया गया खर्च और निवेश 18.27 करोड़ रुपये से अधिक पाया गया। स्पष्ट है कि उन्होंने अपनी वास्तविक आय से लगभग 17.26 करोड़ रुपये अधिक खर्च किए। इसी भ्रष्टाचार और 100 करोड़ की संदिग्ध संपत्ति को आधार बनाकर सरकार ने उन्हें साल 2017 में ही अनिवार्य सेवानिवृत्ति (जबरन रिटायर) दे दी थी, और अब कानूनी कार्रवाई ने रफ्तार पकड़ ली है। विजिलेंस की लंबी जांच में यह भी सामने आया है कि केशव लाल ने अपने गृह जनपद चंदौली सहित उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहरों में करोड़ों रुपये का निवेश किया है। उनके पास वर्तमान में लखनऊ में दो आलीशान कोठियां हैं, जबकि कानपुर, प्रयागराज, गाजियाबाद और नोएडा जैसे महानगरों में बेशकीमती प्लॉट और मकानों के दस्तावेज मिले हैं। इन अचल संपत्तियों को विजिलेंस ने भ्रष्टाचार की कमाई से अर्जित माना है।

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