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नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा को बड़ी राहत मिली है। तेंलगाना की अदालत ने उन्हें एक सप्ताह की अंतरिम जमानत दे दी है। तेलंगाना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नियमित जमानत के लिए उन्हें निर्धारित समय के अंदर सक्षम अदालत के पास जाना होगा। मामले में फैसला न्यायमूर्ति के. सुजाना ने सुनाया, जिन्होंने एक दिन पहले कांग्रेस नेता की याचिका पर सुनवाई की थी। यह आदेश उस समय में आया है जब कांग्रेस प्रवक्ता खेड़ा 7 अप्रैल से जांच एजेंसियों की नजरों से दूर बताए जा रहे थे। दरअसल, असम और दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर खेड़ा से पूछताछ करने उनके दिल्ली स्थिति आवास पर पहुंची थी, लेकिन वे वहां मौजूद नहीं मिले। यह कार्रवाई उस मामले में हो रही थी जिसमें कांग्रेस नेता खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी पर तीन विदेशी पासपोर्ट रखने का आरोप लगाया था।
इस बीच, कांग्रेस नेता खेड़ा ने अग्रिम जमानत के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अदालत में अपना आवासीय पता हैदराबाद बताकर गिरफ्तारी की स्थिति में राहत देने की मांग की। बताया जा रहा है कि उनका तेलंगाना से पारिवारिक संबंध है और हैदराबाद में उनका निजी निवास भी है। साथ ही, राज्य में कांग्रेस की सरकार होने को भी इस कदम से जोड़कर देखा जा रहा है।
मामले ने तूल तब पकड़ा जब खेड़ा ने प्रेसवार्ता में मुख्यमंत्री सरमा और उनकी पत्नी रिनिकी सरमा पर गंभीर आरोप लगाए। खेड़ा ने दावा किया कि रिनिकी के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं और उनके समर्थकों के पास इसतरह के दस्तावेज हैं जो इस कथित खुलासे को साबित करते हैं। उन्होंने इस स्वतंत्र भारत की राजनीति में एक बड़ा मामला बताया।
हालांकि, सीएम सरमा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर पूरी तरह निराधार, दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि खेड़ा जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले सरमा ने तंज कसते हुए कहा था कि जो व्यक्ति पहले गिरफ्तारी की चुनौती दे रहा था, वहीं अब जांच से बचने के लिए हैदराबाद चला गया है। तब सीएम हिमंता ने कहा था कि वह और उनकी पत्नी अगले 48 घंटों के भीतर खेड़ा के खिलाफ आपराधिक और दीवानी, दोनों तरह के मानहानि के मुकदमे दायर करने वाले है।
सुनवाई के दौरान खेड़ा का प्रतिनिधित्व कर रहे कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि यह मामला असम सरकार की राजनीतिक बदले की भावना का परिणाम है। हालांकि, असम सरकार के वकील जनरल देवजीत सैकिया ने इस बात से इंकार किया। वकील सैकिया ने कहा कि खेड़ा की याचिका तेलंगाना उच्च न्यायालय में सुनवाई योग्य नहीं है, लेकिन कांग्रेस नेता ने हैदराबाद स्थित अपना आवासीय पता प्रस्तुत किया।
सिंघवी ने तर्क दिया कि कांग्रेस नेता खेड़ा समाज में गहरी जड़ें जमा चुके हैं और एक प्रमुख राजनीतिक हस्ती हैं। हम संवैधानिक मनमानी के युग में नहीं जी रहे हैं। हम इसतरह युग में नहीं जी रहे हैं जहां बंदूक निकालकर असम से 100 लोगों को निजामुद्दीन (खेड़ा को गिरफ्तार करने के लिए) भेजा जाए, जबकि शिकायत में मानहानि का आरोप लगाया गया है। जवाब में, सैकिया ने कहा कि असम कोई लोकतांत्रिक गणराज्य नहीं है और पूर्वोत्तर राज्य में कानून का पालन होता है।

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