
नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन जारी है। गुरुवार को सीजेपी अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने घोषणा की कि यह आंदोलन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक किसी भी कीमत पर वापस नहीं होगा। दिपके ने स्वास्थ्य कारणों से 26वें दिन की भूख हड़ताल कर रहे वांगचुक से समाप्त करने की अपील भी की, लेकिन स्पष्ट किया कि उनका संगठन अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि वांगचुक का जीवन इस देश के लिए बेहद कीमती है।
दिपके ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ बीती बातचीत को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की, जहां उन्हें पांच घंटे इंतजार कराया गया लेकिन चर्चा केवल दस मिनट की गई। दिपके ने आरोप लगाया कि एक ओर बातचीत का निमंत्रण दिया गया, दूसरी तरफ छात्रों पर बल प्रयोग हुआ। उन्होंने अब सरकार को जंतर-मंतर पर आकर ही बात करने की चुनौती दी। दिपके ने आंदोलन को राजनीति से प्रेरित बताने के आरोपों को सिरे से खारिज कर कहा कि उनका लक्ष्य केवल छात्रों के लिए न्याय सुनिश्चित करना है।
सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बताया कि डेढ़ महीने से चल रहा आंदोलन अब देशभर के युवाओं की आवाज बन गया है, जिसमें हजारों लोग जंतर-मंतर पर और लाखों अन्य विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। रांका के अनुसार, इस आंदोलन की सबसे बड़ी सफलता यह है कि नई पीढ़ी अपने अधिकारों के लिए खुलकर आवाज उठा रही है और सवाल पूछने से डर नहीं रही है।
रांका ने संगठन की मांगों को स्पष्ट बताक किसी समझौते से इंकार किया, और केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान का इस्तीफा प्राथमिक मांग है। उन्होंने जेपी नड्डा से मुलाकात के दौरान मोबाइल फोन जमा कराने के विवाद पर भी सफाई दी, कहा कि दोपहर 12 से 2 बजे तक फोन उनके पास नहीं थे। पहली बैठक के बाद फोन लौटने पर उन्होंने मीडिया को जानकारी दी और सरकार पर अलग नैरेटिव गढ़ने का आरोप लगाया। रांका ने इंटरनेट सेवाएं बंद करने और प्रदर्शन स्थल पर अतिरिक्त सुरक्षा बल की तैनाती का दावा किया, लेकिन जोर दिया कि इन बाधाओं के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटेगी।
