
नई दिल्ली। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार को लेकर एक बड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा, यूएस को लगा था कि वह महज 24 घंटे में ईरान की सरकार गिराकर अपनी पसंद की सरकार बना देगा, लेकिन उसका यह प्लान पूरी तरह नाकाम हो गया। पेजेश्कियन ने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका ने ईरान की ताकत और वहां के लोगों के हौसले को कम आंका था। अमेरिका को उम्मीद थी कि देश के नेताओं, सैन्य कमांडरों और अहम ठिकानों पर हमले के बाद लोग चुप हो जाएंगे और सरकार के खिलाफ खड़े हो जाएंगे। लेकिन इसका उलटा हुआ। हमलों के बाद बड़ी संख्या में लोग सरकार और देश की एकता के समर्थन में सड़कों पर उतर आए।
मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के मामले में वेनेजुएला जैसा रास्ता अपनाने की कोशिश की। उसे लगा कि 24 घंटे के भीतर देश पर काबू पाकर अपनी पसंद की सरकार बनाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने सीरिया जैसी स्थिति पैदा होने की भी उम्मीद की थी। उसका अनुमान था कि ईरान के सुप्रीम लीडर, सैन्य कमांडरों और बड़े अधिकारियों की मौत के बाद सरकार कमजोर पड़ जाएगी और कुछ ही दिनों में सत्ता बदल जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी राष्ट्रपति के मुताबिक, हमलों के बाद ईरान के लोग और ज्यादा मजबूती से एकजुट हो गए। यहां तक कि सरकार से पहले नाराज चल रहे लोगों ने भी देश की जमीन और उसकी एकता की रक्षा के लिए सरकार का साथ दिया। पेजेश्कियन ने कहा कि इस संघर्ष ने देश के अंदर एकता को और मजबूत किया है। उन्होंने दावा किया कि विदेश में रहने वाले कुछ ईरानी भी हमलों के बाद वापस अपने देश लौट आए। ईरान की सरकार, सेना और जनता ने मिलकर अमेरिका के दबाव का सामना किया। मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि अमेरिका ने पहले सैन्य ताकत के जरिए सरकार गिराने की कोशिश की, लेकिन वह नाकाम रहा। इसके बाद उसने ईरान के अहम ढांचे को निशाना बनाया, फिर भी उसे सफलता नहीं मिली। पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान ने अत्याधुनिक सैन्य तकनीक के सामने भी मुकाबला जारी रखा। किसी देश की ताकत का अंदाजा केवल हथियारों और सैन्य तकनीक से नहीं लगाया जा सकता। पेजेश्कियन ने अमेरिका पर ईरान में सामान, खाना और दवाइयों की आवाजाही रोकने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका समुद्री रास्तों को रोक रहा है और जमीन के रास्ते भी बंद करने की कोशिश कर रहा है।
