13 साल पुरानी शादी टूटी, पति ने मानसिक क्रूरता का लगाया था आरोप

जयपुर। करवाचौथ पर दूसरे पुरुष के लिए व्रत रखने और उसके साथ त्योहार मनाने से जुड़े मामले में जयपुर की फैमिली कोर्ट-2 ने एक दंपती के 13 साल पुराने वैवाहिक संबंध को समाप्त करने का आदेश दिया है। न्यायाधीश विशाल भार्गव की अदालत ने पति की तलाक याचिका स्वीकार करते हुए उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर माना कि वैवाहिक संबंधों में विश्वास टूटने और मानसिक क्रूरता से जुड़ी स्थिति पैदा हुई थी।मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पति-पत्नी के रुप में दोनों मई 2013 में शादी के पवित्र बंधन में बंधे थे। पति ने 27 जनवरी 2023 को तलाक के लिए याचिका दायर की थी। पति की ओर से अधिवक्ता विष्णु कुमार शर्मा ने पैरवी की। पति का आरोप था कि पत्नी लंबे समय से उसके साथ दांपत्य संबंध बनाए रखने से इनकार कर रही थी और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही थी। उसने वर्ष 2019 से दोनों के बीच शारीरिक संबंध नहीं होने का दावा भी किया।
दूसरे पुरुष के साथ करवाचौथ मनाने का आरोप
पति ने अदालत में आरोप लगाया कि पत्नी का दूसरे पुरुष के साथ व्यवहार सामान्य मित्रता तक सीमित नहीं था। याचिका के मुताबिक, 24 अक्टूबर 2021 को पत्नी ने दूसरे पुरुष के लिए करवाचौथ का व्रत रखा, उसके नाम की मेहंदी लगाई और गोवा में उसके साथ त्योहार मनाया। पति का दावा था कि पत्नी उस व्यक्ति को पति की तरह मानने लगी थी और उसके साथ घूमने जाती थी। अदालत के सामने इन परिस्थितियों को वैवाहिक संबंधों में विश्वास और पति को हुई मानसिक पीड़ा के संदर्भ में रखा गया। उपलब्ध मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने पति की तलाक याचिका स्वीकार कर ली।
बेटे की देखभाल और कथित प्रताड़ना के आरोप भी उठे
पति ने पत्नी पर उसके और उसके माता-पिता के साथ अपमानजनक व्यवहार करने तथा नाबालिग बेटे की पर्याप्त देखभाल नहीं करने के आरोप भी लगाए थे। उसने यह दावा भी किया कि पत्नी ने उसके खिलाफ झूठी शिकायतें करके उसे मानसिक रूप से परेशान किया। मामले में अदालत के समक्ष यह तथ्य भी आया कि पति-पत्नी करीब एक साल तीन महीने से अलग रह रहे थे। पति के वकील विष्णु कुमार शर्मा के अनुसार, अदालत में दूसरे पुरुष के साथ पत्नी के व्यवहार और पति को हुई मानसिक पीड़ा से जुड़े तथ्य तथा साक्ष्य प्रस्तुत किए गए थे। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर वैवाहिक संबंध समाप्त करने का फैसला सुनाया। यह निर्णय इस मामले में पेश किए गए तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित है।
