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पांढूर्णा- भगवान बिरसा मुंडा जयंती के अवसर पर जेएनयू नई दिल्ली में आयोजित व्याख्यान माला में मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व न्यायधीश प्रकाश भाऊ उईके,मान.डी.डी.उईके केंद्रीय मंत्री जनजाति कार्य विभाग भारत सरकार,श्री निरुपम चकमा सदस्य जनजाति आयोग नई दिल्ली सहित जेएनयू नई दिल्ली के प्रोफेसर एवं स्कॉलर रिसर्च सहित युवा प्रतिभागी शामिल हुए|इस अवसर पर जनजाति समुदाय की परंपरा संस्कृति विषय पर श्री डीडी उईके ने अपने विचार रखे,श्री निरुपम चकमा ने आयोग की कार्य विषय पर विचार रखे|वही मुख्य वक्ता प्रकाश भाऊ उईके ने जनजाति समुदाय में प्रभावी कस्टमरी प्रैक्टिस विषय पर विस्तार से जानकारी दी एवं आज की जटिल न्याय निर्णय की प्रक्रिया पर चिंता जताई और यह भी बताया कि जनजाति समुदाय में व्याप्त कस्टमरी प्रैक्टिस से अनेक मामले का हल स्थानीय स्तर पर हो रहा है,साथ ही उतराधिकार विषय पर प्रकाश भाऊ उईके ने बताया कि 1956 में हिन्दू कोड बिल को लागू किए जाने से महिलाओं को भी पिता की संपति पर बराबर का अधिकार मिल जाता है किन्तु इस कानून के दुष्परिणाम से आज कन्या भ्रूण हत्या 90% सिविल मामले भाई बहनों के मध्य चल रहे हैं,जिससे परिवार रूपी संस्था कमजोर हो रही हैं|

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