

लोधीखेड़ा – शिक्षक राष्ट्र का निर्माता है,वह कभी सेवानिवृत्त नहीं होता|सेवानिवृत्ति न केवल एक व्यक्ति के कार्यकाल का अंत होती है,बल्कि यह उसके जीवन का एक नया अध्याय भी होती है| यह वह समय है जब व्यक्ति अपने जीवन के अनुभवों का संकलन करता है और नए सपनों और आकांक्षाओं को साकार करने का अवसर पाता हैं| यह बात उनके सहयोगी शिक्षक प्रवीण गुरव ने शासकीय माध्यमिक शाला धोतकी-बाघोड़ा में 42 वर्षों से कार्यरत प्रधान पाठक विलास कारेमोरे के सेवानिवृत्ति पर आयोजित सत्कार समारोह में कहीं|उन्होंने यह भी कहा कि श्री कारेमोरे गुरुजी ने अपने कार्यकाल में अद्वितीय समर्पण,कड़ी मेहनत और उत्कृष्टता का परिचय दिया है,उनके योगदान और अनुभव ने हमारी शाला को एक नई दिशा दी है|वही जनपद सदस्य जनार्दन टापरे जो कि इसी शिक्षक के छात्र रहे हैं,ने कहा कि श्री कारेमोरे गुरुजी के समान कोई शिक्षक नहीं मिलेंगे,क्योंकि उनकी शाला और विद्यार्थियों के प्रति प्रेम भावना बहुत अच्छी रही है|मैं श्री कारेमोरे गुरुजी को उनके उज्जवल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं|अपने विदाई सम्मान समारोह में बोलते हुए शिक्षक विलास कारेमोरे ने कहा कि शासकीय माध्यमिक शाला धोतकी-वाघोड़ा में शिक्षकीय कार्य करने का लंबा अनुभव और जीवन भर की सीख से भरा है|हालांकि मैं यहां एक शिक्षक के रूप में शामिल हुआ|लेकिन इन वर्षों में मैं एक छात्र भी बन गया,क्योंकि मुझे अपने छात्रों से बहुत कुछ सीखने को मिला|मैं हमेशा गुरु और शिष्यों के बीच के रिश्तों को संजो कर रखूंगा| मैं मेरे सहयोगी को उनके अंतहीन समर्थन और सहयोग के लिए धन्यवाद देता हूं| इस दौरान अन्य शिक्षक शिक्षिकाओं ने भी अपने विचार व्यक्त कीये| इस अवसर पर मुख्य रूप से शासकीय हाई स्कूल के प्राचार्य श्री भोंगाडे सर, श्री ठाकरे सर,श्री ढोके सर, श्रीमती राने मैडम,श्री होलकर सर,श्री बोबडे सर,श्री बेलेकर सर,श्री हूके सर सहित समस्त विद्यालय परिवार उपस्थित रहा|
