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हाइकोर्ट ने खारिज की क्रिमिनल अपील
इन्दौर । उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर में जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की एकल पीठ ने 500 रुपए की रिश्वत मामले में आरोपी उप कोषालय अधिकारी को सुनाई ट्रायल कोर्ट की सजा को बरकरार रखते उसकी क्रिमिनल अपील खारिज कर दी है। मामला सरकारी स्कूल के सेवानिवृत्त शिक्षक के बकाया भुगतान हेतु रिश्वत लेने का था जिसमें लोकायुक्त ने ट्रैप कार्रवाई में उप कोषालय अधिकारी को 500 रूपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा था। प्रकरण में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार देते एक वर्ष के कारावास और दस हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई थी जिसके खिलाफ उसने हाइकोर्ट में क्रिमिनल अपील दायर की थी। हाइकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय का समर्थन करते उसकी सजा बरकरार रख उसकी अपील निरस्त करते हुए उसे तीन सप्ताह में ट्रायल कोर्ट के समक्ष सरेंडर करने के निर्देश दिए। प्रकरण में लोकायुक्त की ओर से पैरवी एडवोकेट वैभव जैन ने की। प्रकरण कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि 22 सितम्बर 2012 को वीर नारायण सिंह ने लोकायुक्त पुलिस में शिकायत की थी कि एक गवर्नमेंट हायर सेकंडरी स्कूल के रिटायर्ड टीचर्स का बकाया भुगतान आरोपी उप कोषालय अधिकारी श्याम बाबू विकल ने रोक रखा है। उसके बदले रिश्वत मांग रहा है। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी उप कोषालय अधिकारी श्याम बाबू को पांच सौ रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा था। जिला कोर्ट ने आरोपी श्याम बाबू को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी पाते हुए एक वर्ष के कारावास और कुल 10 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ वर्ष 2015 में आरोपी ने हाई कोर्ट में क्रिमिनल अपील दायर की थी। हाई कोर्ट ने सभी पक्षकारों के तर्क सुनने और रिकार्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को सही ठहराते हुए आरोपी की अपील निरस्त कर उसे तीन सप्ताह में ट्रायल कोर्ट के समक्ष सरेंडर करने का आदेश दिया है।

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