
शिक्षक पात्रता परीक्षा मामले मेंहाई कोर्ट ने राज्य शासन से मांगा जवाब
जबलपुर। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने राज्य शासन से पूछा है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा अंतर्गत भर्ती पूर्ण होने से पूर्व नियम कैसे संशोधित कर दिए। मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी वाले सप्ताह में निर्धारित की गई है।
याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी लोचन विश्वकर्मा सहित 18 की ओर से अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह व पुष्पेंद्र कुमार शाह ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता शिक्षक पात्रता परीक्षा-2019 में शामिल हुए थे। जिसमें उत्तीर्ण होने के बाद उच्च माध्यमिक शिक्षक के पद पर भर्ती के लिए आवेदन किया। लेकिन राज्य शासन ने 19000 निर्धारित पदों की भर्ती के स्थान पर महज आठ हजार पदों की भर्ती के उपरांत नियम में संशोधन कर दिया। नियमानुसार इस तरह बीच में नियम संशाेधित नहीं किया जा सकता। संशोधित नियम के अनुसार शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण आवेदकों को उच्च माध्यमिक शिक्षक पद पर भर्ती के लिए शिक्षक चयन परीक्षा भी उत्तीर्ण करनी हाेगी। यह अनिवार्यता लागू करना अनुचित है। ऐसा इसलिए क्याेंकि 19000 रिक्त पदों में से 17000 शिक्षा विभाग व दो हजार अादिवासी विभाग से संबंधित थे। लेकिन इनमें से अब तक महज आठ हजार ही भरे जा सके हैं। इस मामले में जुलाई, 2024 में हाई कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा था। लेकिन अब तक जवाब नहीं आया। हाई कोर्ट ने इस जानकारी को गंभीरता से लेकर राज्य शासन को आगामी सुनवाई से पूर्व जबाव पेश करने के निर्देश दे दिए।
