
रविवार देर शाम ली अंतिम सांस, अंतिम यात्रा आज
जबलपुर । वरिष्ठ पत्रकार काशीनाथ शर्मा का रविवार देर शाम दुखद निधन हो गया है। उनकी अंतिम यात्रा आज सोमवार 9 दिसंबर को दोपहर तीन बजे निज निवास दत्त एंड चड्ढा इंक्लेव सिविल लाइन से ग्वारीघाट मुक्तिधाम जाएगी। बताया जा रहा है कि श्री शर्मा बीते कुछ दिनों से बीमार थे, जिन्हें जबलपुर के सिटी हास्पिटल में भर्ती कराया गया था. रविवार दोपहर उनकी तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें लेकर नागपुर रवाना हुये, जहां रास्ते में ही उन्होंने अंतिम सांस ली. परिजन उन्हें लेकर वापस मेडिकल अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. श्री शर्मा के निधन की खबर आते ही जबलपुर के पत्रकारिता, समाज, राजनीति, प्रशासन सहित जबलपुर में शोक की लहर फैल गई.
हिंदी पत्रकारिता में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले वरिष्ठ पत्रकार पंडित काशीनाथ शर्मा का निधन पत्रकारिता के क्षेत्र में एक अपूरणीय क्षति के रूप में सामने आया है। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब मीडिया के तीनों क्षेत्रों में उन्होंने अपने कार्यों से पत्रकारिता को एक नई दिशा दी। उनकी ईमानदारी, निर्भीकता और सत्य के प्रति अडिग प्रतिबद्धता ने उन्हें एक अनूठी पहचान दी। काशीनाथ जी सहज, सरल और मृदुभाषी थे, लेकिन उनके व्यक्तित्व में साहस और सत्य के प्रति अपूर्व समर्पण का अद्वितीय मेल था।
काशीनाथ ने जबलपुर से भोपाल तक पत्रकारिता की दुनिया में जो छाप छोड़ी, वह आज भी प्रेरणादायक है। वे समाजवादी और गांधीवादी विचारधारा के प्रबल समर्थक थे और छात्र राजनीति के दिनों में शरद यादव जैसे नेताओं के साथ मिलकर छात्रहितों के लिए संघर्ष करते रहे। गांधी जी के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए उन्होंने मैं भी गांधी नामक आंदोलन चलाया, जो उनकी विचारधारा और प्रतिबद्धता का प्रतीक था।
उनका पहनावा, जीवनशैली और स्पष्टवादिता उन्हें पत्रकारों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाती थी। वे हर पीढ़ी के प्रिय थे, और अपनी सहजता से वे हर मिलने वाले को अपना बना लेते थे। हालांकि उनकी बेबाकी को कुछ लोग समझ नहीं पाते थे, लेकिन उनका सत्य बोलने का साहस सभी को प्रेरित करता था।
पंडित काशीनाथ शर्मा का निधन केवल उनके परिवार और मित्रों के लिए ही नहीं, बल्कि हिंदी पत्रकारिता के पूरे जगत के लिए एक बड़ी क्षति है।
