
तुम्हारे भगवान जो भी हैं वह काल्पनिक और नकली हैं, यह कहते हुए धर्मांतरण का दबाव बना रहे थे
इन्दौर। जिला कोर्ट ने धर्मांतरण के दो आरोपियों को धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 1968 की धारा 3 और 4 में दोषी करार देते हुए दोनों को एक एक साल के कारावास और पांच पांच हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। आरोपी अगर तुम ईसाई बनोगे तो पैसा, लोन, बच्चों को फ्री शिक्षा मिलेगी। ईसा मसीह बहुत अच्छे हैं, दयालु हैं, हिन्दू धर्म में कोई दम वाली बात नहीं है। हिन्दू धर्म में कोई वास्तविकता नहीं है। तुम्हारी रामायण, महाभारत झूठ का पुलिंदा है। यदि बाइबिल पढ़ोगे तो तुम्हारे सारे कष्ट दूर हो जाएंगे। तुम्हारे भगवान जो भी हैं वह काल्पनिक और नकली हैं। यह कहते हुए धर्मांतरण का दबाव बना रहे थे। मामला दस साल पुराना है जिसमें हीरानगर पुलिस ने एक लोडिंग रिक्शा चालक पृथ्वीराज सांलुके की शिकायत पर 17 अगस्त 2014 को आरोपी रोशन और एल्विन के खिलाफ धारा 3 और 4 मप्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 1968 की धारा के तहत केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करने के बाद 26 दिसम्बर 2014 को कोर्ट में चालान प्रकरण पेश किया था। प्रकरण में दोनों पक्षों के तर्क, गवाहों के बयान, जब्त सामग्री के आधार पर जिला कोर्ट ने आरोपी रोशन पिता ऑगस्टिन उम्र सैंतालीस साल निवासी पुष्प नगर और एल्विन पिता सुसाई पाल उम्र उनतीस साल निवासी स्कीम 78 को मप्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 1968 की धारा 3 और 4 का दोषी पाया। दोनों को एक साल के कारावास और 5-5 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने पर 3-3 माह का कारावास भुगतना होगा। प्रकरण कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि 17 अगस्त 2014 को लोडिंग ऑटो चालक पृथ्वीराज सांलुके निवासी हीरानगर ने पुलिस से शिकायत की थी कि रोशन और एल्विन उसे क्रिश्चियन धर्म अपनाने पर अच्छी सुविधाओं का लालच दे रहे हैं। दोनों के साथ अन्य लोग भी हैं। ये लोग उनके रहवासी क्षेत्र में अलग-अलग प्रकार के साहित्य, सीडी लेकर घूम रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर तुम ईसाई धर्म स्वीकार कर लोगे तो अच्छी नौकरी लगवा देंगे। फरियादी ने विरोध किया तो दोनों ने उसे गालियां दी और हाथापाई की। इस दौरान पृथ्वीराज के परिचित लोग वहां एकत्र हो गए तो इनमें से तीन लोग भाग निकले। जबकि लोगों ने रोशन और एल्विन को पकड़ लिया। पुलिस ने पृथ्वीराज की शिकायत पर रोशन और एल्विन के खिलाफ धारा 3 और 4 मप्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 1968 की धारा के तहत केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया। फिर 26 दिसम्बर 2014 को कोर्ट में चालान पेश किया था। सुनवाई करते कोर्ट ने माना कि आरोपियों द्वारा किया गया अपराध भारतीय संविधान के अधीन प्रदत्त मौलिक अधिकार का उल्लंघन होने के साथ देश की एकता और अखंडता को प्रभावित करने वाला अपराध है।
