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नौ साल पहले 35000 की रिश्वत लेते पकडने के बाद, दो बार विवेचना में भी अपराध सिद्ध नहीं कर पाई लोकायुक्त पुलिस
इन्दौर । विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) कमलेश सनोडिया की कोर्ट में 35 हजार की रिश्वत लेते नौ साल पहले पकड़ाए सेल्स टैक्स विभाग के सहायक आयुक्त उमेश तिवारी व सहायक रणछोड़ भांवर के खिलाफ दर्ज हुए रिश्वत आरोप मामले में लोकायुक्त पुलिस ने खात्मा प्रतिवेदन पेश किया जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। नौ साल पहले एक ट्रैप कार्रवाई कर लोकायुक्त पुलिस ने सहायक आयुक्त सेल्स टैक्स एवं उसके बाबू को 35 हजार रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा था किंतु लोकायुक्त पुलिस नौ साल बाद भी अपराध सिद्ध नहीं पाई और खात्मा रिपोर्ट पेश कर दी। प्रकरण कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि फरियादी जितेंद्र ठाकुर ने लोकायुक्त पुलिस में शिकायत की थी कि उक्त आरोपियों द्वारा उसके माल सहित पकड़े गए ट्रक को छोड़ने और कम पेनल्टी लगाने के लिए रिश्वत की मांग की जा रही है। इस पर लोकायुक्त पुलिस की टीम ने 16 जनवरी 2015 को मधुमिलन चौराहा स्थित चेतक चेंबर में सेल्स टैक्स में बाबू रणछोड़ भांवर को 35 हजार रुपए घूस लेते हुए पकड़ा था। इस मामले में लोकायुक्त ने रिश्वत की डील की रिकॉर्डिंग भी की थी, जिसमें उमेश तिवारी की आवाज शामिल थी। इस आधार पर उसे भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोपी बनाते दोनों आरोपियों के विरुद्ध 35 हजार रुपए रिश्वत मामले में भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। लोकायुक्त पुलिस द्वारा प्रकरण में दो मर्तबा की गई विवेचना के बाद भी इनके विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य एवं दस्तावेजों के अभाव में लोकायुक्त पुलिस की ओर से खात्मा प्रतिवेदन कोर्ट में पेश किया गया जिसे कोर्ट ने मंजूर करते निर्देश दिए कि यदि भविष्य में इस प्रकरण में किसी प्रकार के अन्य नए तथ्य सामने आते हैं तो विधि अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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