
कट रही हरियाली, आवासीय इलाको में फैल रहा प्रदूषण
अशोकनगर । शासन-प्रशासन पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधे बांटने व लगाने का काम कर रहा हैं। ताकि प्रकृति का विदोहन होने से बचा जाए व गिरते जलस्तर पर रोक लग सके। लेकिन शहर की आरा मशीनों में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही हैं, जो कि नियम विरुद्ध है। कटाई के बाद लकड़ी का खुलेआम परिवहन प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा हैं।
पेड़ों की कटाई से पर्यावरण की क्षति हो रही है तो क्षेत्र में हर साल जलस्तर नीचे गिर रहा हैं। हालात यह हो गए कि लोग पानी को तरसने लगे हैं। इधर, आरा मशीन संचालक नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से पेड़ों की कटाई कर रहे हैं। शहर में अगर दो-चार आरा मशीनों को छोड़ दिया जाये तो बांकी जगह अवैध रूप से पेड़ो की अंधाधुंध कटाई की जा रही है। आरा मशीन को लेकर जब वन विभाग से सवाल किया जाता है तो अधिकारी नियमानुसार कार्रवाई का दावा करते हैं। साल में एक बार आरा मशीन का निरीक्षण करने को बड़ी उपलब्धि मानते हैं। कोई शिकायत मिलती है तो अफसर उसे दूर करने के निर्देश देते हैं। लेकिन कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण आरा मशीनों पर धड़ल्ले से लकड़ी काटने का काम चल रहा है। ऐसे में पर्यावरण विभाग के नियमों की धज्जियां भी उड़ रही है। क्योंकि आरा मशीन संचालन के लिए वन विभाग की अनुमति आवश्यक है। आवासीय क्षेत्र से दूर आरा मशीन लगाई जा सकती है लेकिन शहर के रिहायसी क्षेत्र में आरा मशीने लगी हुई हैं।
वैध आरा मशीन संचालक को लकड़ी चीरने के दौरान वृक्ष का नाम, प्राप्ति, स्वामित्व प्रमाण पत्र, चिराई के बाद आयतन और अवशेष का विवरण रजिस्टर में अंकित करना होता है। इसके अलावा आरा मशीन परिसर में सूचना पट्ट पर मशीन का आकार, ले आउट प्लान, लकडिय़ों का स्टॉक तथा लाइसेंस रखना आवश्यक है। लेकिन नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले आरा मशीन संचालकों के खिलाफ कार्रवाई तो दूर वार्षिक जांच तक समय पर नहीं की जाती है।
