
हाई कोर्ट ने राज्य शासन को दिए निर्देश : समित एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपेगी
जबलपुर। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि हाई स्कूल शिक्षक भर्ती के लिए निर्धारित योग्यता मापदंडों में विभेद के मामले को विशेषज्ञ समिति के समक्ष रखें। समिति इस मुद्दे पर विचार कर एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट संबंधित अधिकारी को प्रस्तुत करेगी। इसके बाद राज्य शासन योग्यता संबंधी नियम में संशोधन करेगी। इस दौरान उक्त पदों पर भर्ती के लिए तैयार की गई प्रतीक्षा सूची को प्रभावी नहीं किया जाएगा। इसके अलावा एससी-एसटी वर्ग को योग्यता में मिली छूट के मामले को भी समिति के समक्ष रखा जाए। मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने मामले पर अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।
याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी प्रीति यादव, अवनीश त्रिपाठी, अनिल साहू सहित दर्जनों अभ्यर्थियों की ओर से योग्यता के मापदंड को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, पुष्पेंद्र शाह, वृंदावन तिवारी, सत्येंद्र ज्योतिषी व अन्य ने दलील दी कि हाई स्कूल शिक्षक भर्ती के लिए बीएड के साथ संबंधित विषय में द्वितीय श्रेणी में स्नातकोत्तर होना जरूरी है। कोर्ट को बताया गया कि प्रदेश के कुछ विश्वविद्यालय 50 प्रतिशत अंक को द्वितीय श्रेणी में मानते हैं, जबकि कुछ 45 प्रतिशत अंक पाने वालों को द्वितीय श्रेणी में मानते हैं। ऐसी स्थिति में कई ऐसे उम्मीदवारों का चयन हो गया है जिन्हें कम प्रतिशत अंक मिले हैं, जबकि अधिक अंक पाने वाले इससे वंचित रह गए हैं।
