
वन अमले पर भांजी लाठियां, पूर्व खवासा रेंज के सिलारी की घटना
बालाघाट। तहसील मुख्यालय कटंगी से 55 किमी. दूर वन्य प्राणी बाघ के हमले से एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई। घटना पूर्व खवासा रेंज के सिलारी के जंगल से सटे खेत की है। रविवार की दोपहर करीब साढ़े 3 बजे हिंसक वन्य प्राणी बाघ ने खेत में कृषि कार्य कर रहे अंबेझरी निवासी 55 वर्षीय सुखराम उइके पर अचानक से हमला कर दिया, जिससे उसकी दर्दनाक मौत हो गई। बाघ ने शव को घटना स्थल से करीब 200 मीटर दूर गन्ने के खेत में ले जाकर फेंक दिया था। शाम करीब साढ़े 4 बजे सुखराम का शव क्षत-विक्षत हालत में दिखाई दिया।
मिली जानकारी अनुसार सुखराम उइके सिलारी जंगल से सटे अपने खेत में कृषि कार्य कर रहा था। इस दौरान बाघ ने अचानक से उन पर हमला कर दिया। ग्रामीणों को इस हमले की जानकारी तब लगी जब सुखराम उइके के मवेशी खेत से घर की तरफ भाग कर आए। ग्रामीणों ने जब खेत की तरफ जाकर देखा तो सुखराम गायब था और खेत में बाघ के पदचिन्ह देखे गए। ग्रामीणों ने तत्काल वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। मगर, इस घटना के बाद वन विभाग के अमले को ग्रामीणों के गुस्से का सामना करना पड़ा। आक्रोशित भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने वन विभाग पर लाठिया भांजी। जिससे खवासा पूर्व के रेंजर घनश्यामदास चतुर्वेदी चोटिल हो गए। वहीं कटंगी रेंज के अधिकारी और कर्मचारी ग्रामीणों में आक्रोश की सूचना मिलने पर गांव के भीतर प्रवेश करने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाए और उलटे पांव लौट गए। मृतक के शव का घटना स्थल पर ही पीएम किया गया। वहीं शव परिजनों को सौंप दिया गया। सोमवार को शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि बीते 15 दिनों से हिंसक वन्य प्राणी बाघ का पूरा कुनबा खैरलांजी गांव के आस-पास देखा जा रहा है. बाघ ने कई बार ग्रामीणों पर हमला करने की कोशिश की. जिसकी जानकारी खवासा और कटंगी रेंज के अधिकारी और बीट गार्ड को दी गई थी. खवासा का अमला तो लगातार गांव में गश्त कर रहा था लेकिन कटंगी वन अमले ने ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। बता दें कि 04 दिन पहले वन्य प्राणी बाघ ने गांव के भीतर घुसकर दयाराम मर्सकोले के पालतू मवेशी बछड़े का शिकार करने की नाकाम कोशिश की थी। इस घटना के बाद हमने जनहानि होने की आशंका जताई थी. वहीं वन विभाग को इस आंशका से अवगत करवाया था लेकिन इसके बावजूद वन विभाग कटंगी का अमला खासतौर से वन परिक्षेत्र अधिकारी बाबूलाल चढार गहरी नींद में सोए हुए थे।
ग्रामीणों की जान को खतरा
ग्रामीणों ने बताया कि खैरलांजी गांव में वन्य प्राणी बाघ का खतरा बीते 15 दिनों से बना हुआ था. 15 दिन पहले अंबेझरी से खैरलांजी मार्ग पर बाघ को देखा गया था. जिसके सिलारी से खैरलांजी मार्ग पर लगातार बाघ की गतिविधियां देखी गई हैं वन विभाग को भी इसकी जानकारी दी गई, लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. नतीजा आज एक किसान को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। अभी कह पाना मुश्किल है कि इस तरह की घटना भविष्य में नहीं होगी. हालांकि वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील की है. बाघ की चहलकदमी से स्थानीय लोगों के साथ ही इस गांव में किसी भी तरह की सामग्री बेचने के लिए आने वाले व्यापारियों का बहुत बुरा हाल है।
