
4 हजार रुपए के अर्थ दंड से किया दंडित
बालाघाट । विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) उत्तम कुमार डार्वी की अदालत ने लोकायुक्त प्रकरण में आरोपी भगवती प्रसाद को 4 वर्ष का सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। वहीं 4 हजार रुपए के अर्थ दंड से दंडित किया है। प्रकरण में अभियोजन की ओर से कपिल कुमार डहेरिया, विशेष अभियोजन अधिकारी/जिला लोक अभियोजन अधिकारी के द्वारा पैरवी की गई है।
जानकारी के अनुसार 20 अप्रैल 2016 को राजकुमार पिता योगराज वडीचार उम्र 42 साल निवासी वार्ड नं 3 वारासिवनी ने एक लिखित आवेदन पुलिस अधीक्षक के समक्ष प्रस्तुत किया था। जिसमें उल्लेख किया गया था कि उसकी पैतृक कृषि भूमि ग्राम बहाकल में है, जो तहसीलदार कार्यालय कटंगी से बंटवारा प्रकरण में फैसले के बाद उनके नाम 1.20 एकड जमीन आई है। इस जमीन का नामांतरण उनके पक्ष में हो चुका है। बही बनाकर देने के एवज में भगवती प्रसाद सोनेकर ने उनसे रिश्वत में दो हजार रुपए की मांग कर रहा था। वह उसे रिश्वत न हीं देना चाहता था। बल्कि उसे रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़वाना चाहता था। शिकायत का सत्यापन कराया गया। जिसमें पाया गया कि भगवती प्रसाद सोनेकर ने 1500 रुपए की मांग की थी। 500 रुपए बाबू ने बातचीत के दौरान ले लिये थे। शेष 1000 रुपए की राशि देने के लिए 23 अप्रैल 2016 को तहसील कार्यालय कटंगी में दिन में बुलाया था। तब प्रार्थी ने लोकायुक्त कार्यालय जबलपुर में पुलिस अधीक्षक को उक्त संबंध में शिकायत की थी। जिसमें लोकायुक्त पुलिस ने एक ट्रेप का आयोजन किया। 23 अप्रैल को तहसील कार्यालय कंटगी में आरोपी भगवती प्रसाद सोनेकर को 1000 रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा था। प्रार्थी की उक्त रिपोर्ट पर आरोपी के विरूद्ध प्रथम दृष्टया अपराध धारा सदर का प्रमाणित पाये जाने से प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। संपूर्ण विवेचना पूर्ण कर अभियोग पत्र विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण) अधिनियम बालाघाट के समक्ष प्रस्तुत किया गया। न्यायालय ने प्रकरण में आई सकारात्मक साक्ष्य के आधार पर आरोपी को 28 दिसंबर को दंडित किया है।
इस प्रकरण में आरोपी भगवती प्रसाद सोनेकर सहायक ग्रेड 3 तहसील कार्यालय कटंगी जिला बालाघाट को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 में 4 वर्ष का सश्रम कारावास और 2000 रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। वहीं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1) घ सहपठित धारा 13 (2) में 4 वर्ष का सश्रम कारावास व 2000 रुपए के अर्थदंड से दंडित किया।
