
भारत सरकार सजा माफ कराने कर रही मदद, परिवार सदमें में डूबा
नई दिल्ली। केरल की नर्स निमिषा प्रिया को यमन में एक नागरिक की हत्या करने के जुर्म में फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। यमन में राष्ट्रपति रशद अल-अलीमी की ओर से निमिषा की मौत की सजा को हाल ही में मंजूरी दे दी गई है। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि एक महीने अंदर उसे फांसी हो सकती है। यह सुनकर नर्स निमिषा का परिवार सदमे में है। साथ ही उसे बचाने के लिए उसके पास समय की कमी है। अब सवाल है कि क्या निमिषा फांसी की सजा से बच सकती है। जानते हैं उसके पास कोई विकल्प है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह यमन में मौत की सजा का सामना कर रही भारतीय नर्स निमिषा के मामले में प्रासंगिक विकल्पों को तलाशने में हरसंभव मदद कर रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हम मदद कर रहे हैं । उन्होंने कहा कि हम यमन में निमिषा प्रिया की सजा से अवगत हैं। केरल के पलक्कड़ जिले के कोलेंगोड की रहने वाली निमिषा प्रिया को एक यमन नागरिक की हत्या के लिए मौत की सजा सुनाई गई है। निमिषा को यमन से भागने की कोशिश के बाद गिरफ्तार किया था। इसके बाद निचली अदालत ने निमिषा प्रिया को 2020 में मौत की सजा सुनाई थी। यमन के सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में इस सजा को बरकरार रखा। अब यमन के राष्ट्रपति रशद अल-अलिमी ने निमिषा प्रिया की मौत की सजा को मंजूरी दे दी है।
यमन में इस्लामिक कानून है। ऐसे में निमिषा के पास ब्लड मनी का एक विकल्प है। इस कानून के मुताबिक अपराध का शिकार व्यक्ति या उसका परिवार पैसे लेकर अपराधी को माफ करने का विकल्प चुन सकता है। यदि पीड़ित का परिवार ब्लड मनी को स्वीकार कर लेता है तो निमिषा की मौत की सजा माफ हो जाएगी। इसके बाद उसकी रिहाई तय हो सकती है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक फांसी की सजा माफ कराने के लिए उसके परिवार को 400,000 डॉलर देने होंगे। 2020 में सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल’ का गठन किया गया था। वे वर्तमान में उसकी रिहाई के लिए आवश्यक धन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट में प्रिया की मां प्रेमा कुमारी की पैरवी कर चुके सुप्रीम कोर्ट के वकील सुभाष चंद्रन का कहना है कि मामले में भारत सरकार के हस्तक्षेप से मौत की सजा को टाला जा सकता है।
केरल के पलक्कड़ जिले के कोलेनगोडे की रहने वाली निमिषा प्रिया 2008 में यमन चली गईं थी। उसने 2011 में केरल के ही टॉमी थॉमस से शादी कर ली। वे अपना खुद का क्लिनिक खोलना चाहती थी। तलाल अब्दो महदी ने क्लिनिक खोलने में निमिषा की मदद की। महदी पहले से ही शादीशुदा था। वह निमिषा को अपनी दूसरी पत्नी बताता था। 2016 में निमिषा की शिकायत पर महदी जेल में रहना पड़ा था। जेल से बाहर आने के बाद उसने निमिषा का पासपोर्ट छीन लिया। पासपोर्ट लेने निमिषा ने उसे बेहोशी का इंजेक्शन दे दिया। ओवरडोज से महदी की मौत हो गई। इस मामले में नर्स निमिषा को फांसी की सजा सुनाई गई है।
