
नई दिल्ली। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सत्ता से बेदखली के बाद भारत में रहते हुए पहली बार अपनी हत्या की साजिश का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि किस प्रकार से उन्हें और उनकी बहन शेख रेहाना के खिलाफ हत्या की साजिश रची गई थी। उनका कहना है कि हत्या की साजिश तो कई बार रची गई, लेकिन वो चमत्कारिक रूप से बच गईं।
शेख हसीना ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अपना संदेश दिया है। उन्होंने अवामी लीग के फेसबुक पेज पर एक ऑडियो संदेश में कहा, कि रेहाना और मैं 20-25 मिनट के अंतर से मौत से बच गईं। यह अल्लाह की मर्जी है कि हम जिंदा हैं। शेख हसीना ने याद करते हुए कहा कि यह पहली बार नहीं है जब उन्हें निशाना बनाया गया। 21 अगस्त 2004 को ढाका में एक आतंकवाद विरोधी रैली के दौरान एक ग्रेनेड हमला हुआ था। इस हमले में 24 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 500 से अधिक लोग घायल हुए। इस हमले में हसीना मामूली चोटों के साथ बच गईं। इससे पहले 2000 में कोटालीपारा बम साजिश रची गई थी, जिसमें उनकी रैली से पहले 76 किलो का बम बरामद हुआ था।
सत्ता से बेदखली और भारत में शरण
पिछले साल, छात्रों के नेतृत्व में हुए आंदोलन को देखते हुए शेख हसीना अपनी बहन के साथ बांग्लादेश छोड़ भारत आ गईं थी। इसके बाद बांग्लादेश में तेजी के साथ राजनीतिक घटनाक्रम हुआ और यूनुस की अंतरिम सरकार घोषित कर दी गई। तभी से सत्ता से बेदखल प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में रह रही हैं। बांग्लादेश सरकार ने उनका पासपोर्ट भी रद्ध कर दिया है, लेकिन भारत सरकार ने उन्हें रहने की इजाजत दे दी है। ढाका ने औपचारिक रूप से भारत से उनके प्रत्यर्पण का अनुरोध किया है।
निर्वासन और गिरफ्तारी वारंट
बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना के 15 साल के शासनकाल के दौरान कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। उन पर 500 से अधिक लोगों के अपहरण का आरोप है।
हसीना का भावुक संदेश
शेख हसीना ने अपने संदेश में कहा, कि 21 अगस्त का हमला, कोटालीपारा बम साजिश और अब हालिया खतरा। मैं हर बार बच गई। यह केवल अल्लाह की इच्छा है कि मैं आज जिंदा हूं। शेख हसीना के इस खुलासे ने बांग्लादेश की राजनीति में नए विवादों को जन्म दे दिया है, और उनके भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
