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डेढ़ साल पहले निकला था आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती का था टेंडर
भोपाल। राजधानी भोपाल में आयुष विभाग में करीब ड़ेढ़ साल पहले निकले आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती का 60 करोड़ का टेंडर दिलवाने के नाम पर विभाग की ही महिला कर्मी द्वारा मानव संसाधन आपूर्ति से जुड़ी कंपनी से सवा करोड़ की ठगी किेय जाने का मामला सामने आाया है। कंपनी ने महिला के कहने पर टेंडर पाने के लिए उसे सवा करोड़ की रकम रिश्वत के तौर पर दी थी। लेकिन बाद में विभाग ने वह टेंडर निरस्त कर दिया, टेडंर न मिलने पर कंपनी ने अपनी रकम वापस लौटाने को कहा तब महिला कर्मचारी ने पैसा देने से मना कर दिया। इसके बाद कंपनी के संचालक ने महिला के खिलाफ थाने में लिखित शिकायत की, लंबी जॉच के बाद बिलखिरिया पुलिस ने महिला कर्मचारी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला कायम कर लिया है। मामले में पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना कोकता आरटीओ के पास रहने वाले धर्मवीर सिंह सेंगर ने लिखित शिकायती आवेदन देते हुए बताया था की वह मूल रुप से ग्वालियर के रहने वाले है, और वर्तमान में बिलखिरिया क्षेत्र में रहते हुए सेंगर सिक्योरिटी सर्विसेज नाम से सिक्युरिटी कंपनी चलाते हैं। उनकी कंपनी ऑल इंडिया में काम करती है। साल 2023 में आयुष विभाग में साढ़े तीन हजार आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती के लिए 60 करोड़ का टेंडर निकाला गया था, जिसे पाने के लिये उनकी कंपनी की और से भी टेंडर डाला गया था। उस समय विभाग में कार्यरत प्रगति श्रीवास्तव पति चन्द्रप्रकाश श्रीवास्तव निवासी 9 बी-साकेत नगर ने उन्हें टेंडर दिलाने का आश्वासन दिया। दरअसल काम के सिलसिले में प्रगति को वह पहले से पहचानते थे, और पू्र्व में वह प्रगति से आयुष विभाग में अपने पेंडिंग बिलों का भुगतान करवाने के लिये मदद ले चुके थे। प्रगति ने उनसे कहा कि उसकी आयुष विभाग में अधिकारियों से काफी पहचान है, और वह उन्हें आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती का टेंडर दिला सकती है। बातचीत होने पर टेंडर पाने के ऐवज में महिला ने सेंगर से सवा करोड़ की रकम की मांग की थी। बातचीत तय होने पर सेंगर ने प्रगति श्रीवास्तव को ऑनलाइन 15 लाख रुपए दे दिए। इसके बाद प्रगति ने उनसे कहा कि टेंडर उन्हें ही मिलेगा इसके लिये 1 करोड़ 10 लाख रुपए और देने पड़ेगे। फरियादी ने जैसै-तैसे पैसो का इंतेजाम कर आरटीओ ऑफिस कोकता के पास 11 अक्टूबर 2023 को प्रगति श्रीवास्तव को दे दी। लेकिन किसी कारण से जनवरी 2024 में यह टेंडर विभाग ने निरस्त कर दिया। टेंडर कैसिंल होने पर धर्मवीर सिंह ने रकम वापस मांगी। पैसा लौटाने के नाम पर प्रगति बीते एक साल से अधिक समय से टाल-मटोल कर रही थी। जब उसने रकम नहीं लौटाई तब परेशान होकर फरयिादी धर्मवीर सिंह पुलिस के पास पहुंचे, शिकायत की जांच के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कार्यवाही शुरु कर दी है। बताया गया है कि विभाग में कार्यरत प्रगति श्रीवास्तव के पति चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव ठेकेदार है। सूत्रो के अनुसार स्थानीय नेताओ से प्रगति के काफी अच्छे राजनीतिक संबंध हैं।

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