पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में चौथे दिन मनाया गया तप कल्याणक


छिंदवाड़ा। श्री मज्जिनेंद्र आदिनाथ जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में चौथे दिन शनिवार को तीर्थंकर आदिनाथ भगवान का तप कल्याणक मनाया गया। आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्यश्री समय सागर जी महाराज के आशीर्वाद से निर्यापक मुनिश्री प्रसाद सागर जी महाराज, मुनिश्री पद्म सागर जी महाराज, मुनिश्री शीतल सागर जी महाराज के सानिध्य में छिंदवाड़ा में सुसज्जित अयोध्या नगरी में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव आयेाजित किया जा रहा है। महोत्सव में देशभर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पंचकल्याणक में शनिवार को अयोध्या नगरी में महाराज नाभिराय के दरबार में आदिकुमार का राज्याभिषेक किया गया। 32 हजार राजाओं द्वारा भेंट समर्पण, राज्य संचालन के बाद नीलांजना नृत्य की प्रस्तुति हुई। इसके पश्चात आदिकुमार के मन में वैराग्य की उत्पत्ति हो गई। भरत बाहुबली को राज्य सौंपकर आदिकुमार वन की ओर प्रस्थान कर गए। इसके पश्चात दीक्षाविधि संस्कार आदि हुए। इससे पूर्व शनिवार की सुबह प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रम्हचारी प्रदीप भैया सुयश के निर्देशन में पूजन अनुष्ठान हुए। रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत सतेंद्र शर्मा एंड पार्टी कंठस्थ कला केंद्र, दिल्ली द्वारा भव्य नाटिका की प्रस्तुति दी गई। शनिवार को भगवान का मुकुट प्राप्त करने का सौभाग्य अमरेश गोयल को एवं माला प्राप्त करने का सौभाग्य शांता जैन, स्वाति अंकित जैन को प्राप्त हुआ। भगवान की पिच्छिका प्राप्त करने का सौभाग्य सेठ परिवार, मंजू राजेश जैन, कविता संचित जैन, शुभांगी संजीत जैन, रितु अमरीश जैन, मिथलेश जैन को प्राप्त हुआ।

बच्चों को दें अच्छे संस्कार: मुनिश्री
शनिवार को प्रवचन सभा में मुनिश्री शीतल सागर जी महाराज ने कहा कि जब तक बालक आठ वर्ष का नहीं हो जाता, तब तक बालक जो भी क्रियाएं करता है पुण्य की या पाप की, उनसब का फल माता-पिता को लगता है। गीली मिट्टी जब तक है, तब तक उसे जैसा आकार देना है वैसा दे सकते हैं। उसके बाद उसमें परिवर्तन करना कठिन हो जाता है। जब तक बालक आठ वर्ष का होता है, तब तक उसे इस तरह के संस्कार दे दिया जाएं कि फिर वो अगले अस्सी साल तक अपना कल्याण करने के मार्ग पर चले और आपको भी गौरवान्वित कर पाए। दीक्षा कल्याणक और तप कल्याणक एक ही हैं। एक चीज देखने में आती है, कि जितने भी तीर्थंकर हुए उनमें से अधिकांश के जन्म दिवस के दिन ही उनकी दीक्षा हुई। आदिनाथ भगवान का जन्म महोत्सव मनाया जा रहा था और उसी महोत्सव में उनको वैराग्य का कारण उत्पन्न हो गया।


आज मनाया जाएगा ज्ञानकल्याणक:-
अयोध्या नगरी में आयोजित श्री मज्जिनेंद्र आदिनाथ जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में रविवार को ज्ञानकल्याणक मनाया जाएगा। सुबह पूजन अनुष्ठान के पश्चात 8 बजे से मुनिश्री के प्रवचन एवं सुबह 9 बजे से महामुनिराज आदिसागर जी की आहारचर्या होगी। दोपहर 12 बजे से ज्ञानकल्याणक पूजन सहित विविध अनुष्ठान होंगे। शाम 6 बजे आदिनाथ धाम से अयोध्या नगरी में महाआरती का आगमन, रात्रि 7 बजे से आरती, प्रवचन एवं रात्रि 8 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
