
लोकायुक्त पुलिस एवं ईडी सौरभ शर्मा मामले को रफा-दफा करने मे लगी है: – मुकेश नायक
भोपाल। प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने सौरभ शर्मा की गिरफ़्तारी पर सवाल उठाते हुये कहा कि मनीष सिसौदिया और हेमंत सोरेन सहित देश के अन्य नेताओं पर, मुख्यमंत्री स्तर के नेताओं की गिरफ्तारी पहले होती है। चार्जसीट बाद मे फाइल होती है, लेकिन मप्र में मंत्री स्तर के नेताओं की गिरप्तारी नहीं हुई। सौरभ शर्मा के प्रकरण मे ऐसा नही होता, आखिर क्यों? इस देश में पक्षपात, अन्याय, भ्रष्टाचार और देश को लूटने वालों का नापाक संबंध चल रहा है। लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ शर्मा को रिमांर्ड पर लिया, ईडी की जांच अलग से चल रही है। सरकारी गवाह बनाने की तैयारी हो चुकी है। स्पष्ट दिखाई दे रहा है मामले को रफा दफा करने की कोशिश है।
श्री नायक ने मांग करते हुये कहा है कि गोविंद सिंह राजपूत जो परिवहन मंत्री रहे भूपेन्द्र सिंह ठाकुर परिवहन मंत्री रहे तत्काल एवं इस अवधी मे रहे सभी परिवहन कमीशनर को पुलिस गिरफ्तार करे यदि हिरासत की अवधि में जांच होनी चाहिए। पहले ही इनका झुठ पकड़ा गया। यदि ये बाहर रहे तो जांच प्रभावित होगी। पुलिस उन्हें गिरफ्तार करे। भूपेन्द्र सिंह का कहना है कि सौरभ शर्मा की नियुक्ति में इनका कोई योगदान नही, जबकी स्वस्थ विभाग के कर्मचारी को परिवहन विभाग में सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करके परिवहन विभाग में नियुक्त करने का काम भूपेन्द्र सिंह ने ही किया, सारे नियम ताक पर रखकर यह नियुक्ति की गई, जबकी अभी भी हजारों लोग मध्यप्रदेश में अनुकंपा नियुक्ति के लिए भटक रहे हैं, रिमांड पर लिया गया सौरभ शर्मा जो 41 दिन बाद पुलिस की गिरफ्त में आया है, कई माध्यम से यह जानकारी प्राप्त हुई है कि वह 23 जनवरी को दुबई से भारत आ गया। फिर किसके संरक्षण मे यहां रहा यह जांच का विषय है।
श्री नायक ने कहा कि मंत्री मंत्री गोविंद राजपूत के इतने पाप हो गए है कि इनके लिए जेल का स्थान ही उचित है। मंत्री राजपूत का पूर्व का एक प्रकरण है जो 22/8/2016 को मानसिंह पटेल नामक एक व्यक्ति गायब हो गया, इनके पुत्र ने एक दिन बाद सीताराम उर्फ महेश ने यह रिपोर्ट लिखाई कि गोविंद राजपूत सात आठ लोगों के साथ उनके पिता को उठाकर ले गए उनका अपहरण कर लिया यह रिपोर्ट मानसिंह के पुत्र ने सागर के सिविल लाइन थाने में नामजद रिपोर्ट कराई थी, जिसे गोविंद राजपूत ने शासन का उपयोग करते हुये यह नामदज रिनोर्ट अज्ञात के विरूद्व प्रकरण बनाकर रिपोर्ट दर्ज करवा दी।
श्री नायक ने कहा कि इतना ही नहीं जब सुप्रीम कोर्ट में परिवाद के लिए लोग गये और सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी का गठन कर जांच के आदेश दिये तो सबसे बड़ा फार्ड गोविंद राजपूत ने किया। अपहरण के 37 दिन बाद सुप्रीम कोर्ट में उस व्यक्ति के नाम फर्जी एफिडेविट दिलवाया जो लापता है, गायब है, जिसमें यह लिखा गया कि क्या इस मुकदमे को वापस लेना चाहते हैं।
