
कान्हा नेशनल पार्क क्षेत्र में गांव के समीप बाघ का बना हुआ है मूवमेंट
बालाघाट। कान्हा नेशनल पार्क क्षेत्र में गांव के समीप बाघ का मूवमेंट बना हुआ है। बाघ लगातार इधर से उधर विचरण कर रहा है। बाघ की तलाश वन अमला कर रहा है। दो हाथियों के सहारे गांव के समीप और जंगलों में बाघ की खोज की जा रही है। लेकिन अभी तक बाघ नहीं मिल पाया है। इधर, बाघ के हमले के बाद से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीण खेत जाने से कतरा रहे हैं। इससे कृषि कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
जानकारी के अनुसार कान्हा नेशनल पार्क के बफर जोन और गढ़ी थाना क्षेत्र के नुनकाटोला काशमीरी नाले के समीप कृषि कार्य कर रहे दो किसानों पर बाघ ने हमला कर दिया था। बाघ के हमले से हरेसिंह मेरावी 55 वर्ष और सुरभ सिंह पिता झामसिंह कुशरे 50 वर्ष दोनों गंभीर रुप से घायल हो गए थे। घायलों को तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गढ़ी में भर्ती कराया गया था। जहां से गंभीर हालत होने पर दोनों ही किसानों को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय रेफर किया गया। जहां उनका उपचार जारी है। लेकिन इस घटना के बाद से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।शिकार करते हुए कैमरे में कैद हुआ बाघ
बाघ का पता लगाए जाने के लिए कान्हा नेशनल पार्क क्षेत्र से सटे दो परिक्षेत्रों में 16 ट्रेप कैमरे लगाए गए हैं। ताकि बाघ का मूवमेंट होने पर वह कैद हो सकें। बताया गया है कि बाघ एक कैमरे में शिकार करते हुए कैद हुआ है। जिससे बाघ की मौजूदगी स्पष्ट हो रही है। बाघ का पता लगाए जाने के लिए दर्जनों कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है।
गांवों में कराई मुनादी
वन अमले ने ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है। घटना स्थल के समीपस्थ आधा दर्जन से अधिक गांवों में मुनादी भी कराई गई है। ताकि कोई भी ग्रामीण अकेले जंगल की ओर न जा सकें। हालांकि, घटना के बाद से ग्रामीण काफी डरे-सहमे हुए है। लोग घरों के बाहर निकलने से कतरा रहे हैं।
हाथियों के सहारे चलाया जा रहा सर्च ऑपरेशन
बाघ की लोकेशन पता लगाने के लिए हाथियों के सहारे सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। बताया गया है कि मुक्की रेंज से दो हाथियों का दल महावत के साथ गढ़ी मुख्यालय और उसके आस-पास के क्षेत्रों में गश्त कर रहा है। खासतौर पर गांव से सटे जंगलों की ओर बाघ के पैरों के निशान देखे जा रहे हैं। हालांकि, बाघ का लोकेशन और पैरों के निशान अभी तक नहीं मिल पाए हैं।
कृषि कार्य हो रहा है प्रभावित
बाघ के हमले के बाद से ग्रामीणों में जहां दहशत का माहौल है। वहीं कृषि कार्य भी प्रभावित हो रहा है। किसान अपने खेतों में जाने से कतरा रहे हैं। दरअसल, गढ़ी क्षेत्र में किसानों ने अपने खेतों में गेहूं, चना, धान सहित अन्य फसलें लगाई है। जिसकी देखरेख और सिंचाई के लिए किसान खेतों तक जाते हैं। लेकिन बाघ के हमले के बाद से किसान घरों से बाहर ही नहीं निकल पा रहे हैं।
