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4 सप्ताह में स्पष्टीकरण पेश करने के निर्देश
जबलपुर। हाई कोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने मुस्कान पार्क प्रोजक्ट में दुकानों के अवैध निर्माण के मामले में पूर्व आदेश का पलान न किए जाने के रवैये को गंभीरता से लिया। इसी के साथ नगर निगम, जबलपुर की आयुक्त प्रीति यादव के विरुद्ध अवमानना नोटिस जारी कर दिए। उन्हें चार सप्ताह में स्पष्टीकरण पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
अवमानना याचिकाकर्ता अधिवक्ता मुकेश जैन की ओर से अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता ने दलील दी कि हाई कोर्ट ने 24 जून,2024 को जनहित याचिका पर आदेश पारित किया था। जिसके जरिए 80 फीट चौड़ी सार्वजनिक रोड पर बिल्डर शंकर मंच्छानी द्वारा मुस्कान पार्क प्रोजक्ट में दुकानों का अवैध निर्माण करने की शिकायत का निराकरण करने के आयुक्त नगर निगम को निर्देश दिए थे। यह निराकरण चार माह की अवधि में किया जाना था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि हाई कोर्ट चौराहे से दूसरे पुल के बीच निर्माणाधीन मुस्कान पार्क के सामने 80 फीट रोड के हिस्से में अवैध रूप से दुकान, फ्रंट एमओएस, पार्किंग व गार्डन आदि का निर्माण कर सार्वजनिक रोड को संकरा करने और जन सामान्य के आवागमन में बाधा डाली जा रही है। हाई कोर्ट से सेकेंड ब्रिज वाले मार्ग पर स्वामी दयानंद सरस्वती वार्ड, नेपियर टाउन जबलपुर स्थित नजूल भूमि पर मुस्कान पार्क का निमाण शंकरलाल मंछानी द्वारा किया जा रहा है। नगर तथा ग्राम निवेश विभाग और आयुक्त नगर पालिका निगम जबलपुर द्वारा उक्त भूमि पर दी गई विकास अनुज्ञा और भवन अनुज्ञा के नक्शे में भवन के सामने स्थित रोड को 80 फीट चौ़ड़ा दिखाया गया है। व्यस्ततम सड़क के मध्य से 40 फीट रोड के क्षेत्र में से मुस्कान पार्क की दिशा की ओर स्थित करीब 25 वें फुट से बिल्डर शंकर मंछानी के द्वारा अवैध रूप से फर्श (फ्लोर) का निर्माण शुरू किया गया, जो कि 50 वे फीट रोड क्षेत्र तक हुआ है। इस प्रकार बिल्डर द्वारा रोड के उक्त हिस्से पर कब्जा कर उसे बिना अनुमति के अपने भवन के फ्रन्ट एमओएस हिस्से के रूप में प्रदर्शित किया गया है और फ्रन्ट एमओएस के लिए विहित 40 फीट लंबाई वाली वास्तविक जगह में से आधी से अधिक लंबाई पर (जो कि करीब 20 फीट के आसपास बैठता है), उसे खाली छोड़ने के स्थान पर उस पर दुकानों का अवैध निर्माण कर उसे उन्हें नगर निगम की अनुमति के बिना चालू भी कर दिया गया है। उक्त अवैध निर्माण के कारण सार्वजनिक रोड के मध्य से भवन की दूरी 80 फुट से करीब 30 फीट घटकर 50 फीट ही रह गई है। इसके फलस्वरूप मार्ग आंशिक रूप से सकरा होने से पहले की तुलना में आवागमन अपेक्षाकृत कठिन हो गया है। रोड के सकरा होने से और मुस्कान पार्क में कामर्शियल दुकानों के अवैध निर्माण के कारण आगे चलकर जब वाहनों की संख्या में वृद्धि होगी तो आवागमन में बाधा और ज्यादा बढ़ेगी। साथ ही पार्किंग की समस्या भी पैदा होगी। इसलिए इन अवैध निर्मित दुकानों और व्यावसायिक आफिसों को ध्वस्त कर वहां फ्रंट ओपन स्पेस का निर्माण किया जाना आवश्यक है। नगर निगम आयुक्त को मुकेश जैन द्वारा की गई शिकायत का चार माह में निराकरण करने का आदेश दिया था परन्तु नगर निगम आयुक्त द्वारा आदेश का पालन नहीं किया गया। हाई कोर्ट के आदेश का पालन न होने के कारण पहले इस मामले में विविध सिविल याचिका दायर की गई थी। किन्तु आदेश की अवमानना किए जाने के दृष्टिगत न्यायालय द्वारा प्रकरण की विविध सिविल प्रकृति को बदलकर अवमानना की श्रेणी में रखते हुए रजिस्ट्री को निर्देश दिया था।

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